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अब क्या होगा एयर इंडिया का, सरकार की नज़र हुई तिरछी

What will happen now Air India, the government has noticed the skew

नई दिल्लीः एयर इंडिया का भविष्य खतरे में पड़ गया है,क्योंकि सरकार ने अपनी नजर जरा तिरछी कर दी है। फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने कहा कि सरकार एयर इंडिया के परिचालन से बाहर निकलने की योजना बना रही है। जेटली ने कहा कि जेट एयरवेज, इंडिगो, गोएयर जैसी कई निजी एयरलाइंस हैं। अगर 86 फीसदी एयरलाइन मार्कीट को प्राइवेट सेक्‍टर संभाल सकता है तो 100 फीसदी भी इसके द्वारा चलाया जा सकता है।

करोड़ों का कर्ज- एयर इंडिया की बाजार हिस्सेदारी 14 फीसदी है और उस पर 50,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। जेटली ने कहा, ‘एयर इंडिया पर 50,000 करोड़ रुपए का कर्ज है, जबकि उसके एयरक्राफ्ट का वैल्‍युएशन लगभग 25,000 करोड़ रुपए होगा। सिविल एविएशन मिनिस्‍ट्री सभी संभावनाएं तलाश रही है। एयर इंडिया सरकार से 10 साल के लिए 30 हजार करोड़ रुपए का बेल आउट पैकेज ले रही है। 2012 में मनमोहन सिंह की सरकार ने इस पैकेज का एलान किया था। फ्यूल प्राइस कम होने और पैसेंजर्स की संख्‍या में बढ़ोतरी की वजह से 2015-16 में इस एयरलाइन को 105 करोड़ का मुनाफा हुआ था।

कर्ज कम करने की वकालत – इससे पहले सिविल एविएशन स्‍टेट मिनिस्‍टर जयंत सिन्हा ने कहा था कि एयर इंडिया के कर्जों को कम करने की जरूरत है तथा इसमें वित्तीय बदलाव के लिए बैलेंस शीट के पुर्नगठन की जरूरत है। सिन्हा ने कहा था कि एयर इंडिया में कॉरपोरेट प्रशासन और बेहतर मैनेजमेंट को लागू करने की भी जरूरत है। इसके अलावा यह भी देखा जाना चाहिए कि एयर इंडिया की गैर-महत्वपूर्ण प्रॉपर्टीज का किस प्रकार से अच्‍छे से उपयोग किया जा सकता है।

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