अजमेर

ख्वाजा की दरगाह में धार्मिक रस्में कराने वाली हिलाल कमेटी का विवाद सुलझा

Resolve the dispute of the Hilal committee, who took religious rites in Khwaja's dargah

अजमेर। राजस्थान में अजमेर में ख्वाजा दरगाह कमेटी के अधीन धार्मिक रस्मों को कराने वाली हिलाल कमेटी द्वारा पिछले दिनो दिए गए इस्तीफे को परस्पर समझाइश के बाद वापास ले लिया गया है।

हिलाल कमेटी के सदस्यों के इस्तीफे के चलते 805वे सालाना उर्स की धार्मिक रस्मे और जुम्मे की बड़ी नमाज अदा कराने को लेकर असमंजस बना हुआ था। दरगाह कमेटी सूत्रों के अनुसार दरगाह नाजिम कर्नल मंसूर अली और हिलाल कमेटी के अध्यक्ष एवं शहर काजी तौसिफ अहमद चिश्ती के बीच हुए सुलहेनामे ने कमेटी के इस्तीफा प्रकरण का पटाक्षेप कर दिया।इस मौके पर अंजुमन सचिव हाजी वाहिद हुसैन अंगारा सदस्य मुन्नवर चिश्ती तथा अंदरकोटियान पंचायत के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।हिलाल कमेटी के छह सदस्यों द्वारा इस्तीफा वापस लेने के बाद विरोध कर रहे लोगों ने शहर काजी को गले लगाया और बैठक में स्वीकार किया कि हिलाल कमेटी का जो निर्णय होगा वह मान्य होगा।

अंजुमन सदस्य मुन्नवर चिश्ती ने बताया कि तय किया गया है कि दौरान-ए-उर्स इंशा की नमाज तक अगर चांद दिखा तो इसकी घोषणा कर दी जाएगी अन्यथा हिलाल कमेटी रात ग्यारह बजे तक इंतज़ार करेंगी।

उल्लेखनीय है कि पिछले मौके पर हिलाल कमेटी द्वारा चांद को लेकर निर्णय बदलने का चोतरफा विरोध हुआ था।हिलाल कमेटी पर आरोप लगा था कि वह दरगाह कमेटी के दबाव में काम करती है और चांद दिखने अथवा न दिखने के गफलत भरे निर्णय से पूरे देश में संदेश गलत जाता है।कई लोगों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए शहर काजी के साथ बदतमीजी की थी और दरगाह कमेटी के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया था। इससे आहत होकर अध्यक्ष सहित पूरी हिलाल कमेटी ने दरगाह नाजिम को इस्तीफा सौंप दिया। जिसके बाद गत क ई दिनो से सुलह के प्रयास चल रहे थे जिसपर आज सफलता मिल गई।

अब 805वें सालाना उर्स के चांद दिखाई देने की घोषणा विधिवत रूप से हिलाल कमेटी ही करेंगी जिसके बाद 28 या 29 मार्च से ख्वाजा साहब का सलाना उर्स शुरू हो जाएगा।झंडे की रस्म आज सायं भीलवाड़ा के गौरी परिवार द्वारा निभाई जाएगी।

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