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MosqueMeToo कैंपेन क्या है, क्या मस्जिदों में भी होता है यौन उत्पीड़न ?

पिछले साल #Metoo कैंपेन के साथ महिलाओं ने अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न को दुनिया के सामने खुलकर कहा था. #Metoo के साथ इस समय सोशल मीडिया में ही #MosqueMeToo भी ट्रेंड करने लगा है जिसमें महिलाएं मस्जिदों में हुए यौन उत्पीड़न की घटनाओं को खुलकर बयां कर रही हैं.

मस्जिदों में महिलाओं के खिलाफ हो रहे यौन उत्पीड़न के खिलाफ चल रहे #MosqueMeToo कैंपेन के बारे में जानिये.

#MosqueMeToo की शुरुआत

मस्जिदों में महिलाओं के साथ हुई यौन उत्पीड़न को उजागर करने वाले इस कैंपेन की शुरुआत पत्रकार और लेखिका मोना एल्ताहवी ने अपने साथ हज यात्रा के समय हुई यौन उत्पीड़न की घटना के बाद की थी. मोना एल्ताहवी के द्वारा इस घटना को उजागर करने के बाद उनके पास लोगों के मैसेज आने लगे.

एक अंग्रेजी वेबसाइट से बात करते हुए मोना कहती हैं कि मेरी कहानी पढ़ने के बाद एक मुस्लिम महिला ने अपनी मां के साथ हज यात्रा के समय हुई यौन उत्पीड़न की घटना को विस्तृत रूप से लिखकर मुझे मेल किया था.

लोगों की कहानी

मस्जिदों में महिलाओं के साथ हुए घटनाओं को उजागर करने वाले इस कैंपेन के लिए ट्विटर पर @reallyHibbs हैंडल से लिखा गया कि जब मैं जामा मस्जिद में गई तो एक व्यक्ति ने मेरी छाती पर हाथ मारने का प्रयास किया था. उस समय उन्होंने इस संबंध में किसी से भी बात नहीं की थी क्योंकि लोगों को उस समय लगता कि मैं इस्लामोफोबिया का समर्थन कर रही हूं.

विदेशी मस्जिदों में भी उत्पीड़न

ट्विटर पर @djenanggulo हैंडल के साथ एक महिला ने लिखा कि सऊदी अरब में स्थित मस्जिद नवाबी से कुछ फीट की दूरी पर ही एक व्यक्ति ने उनका हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचने का प्रयास किया गया.

लोगों को पता है

ट्विटर पर @nargesska नामक एक हैंडल से एक महिला ने लिखा कि धर्मस्थलों पर जाने से पहले महिलाओं को चेतावनी दी जाती है. जब मेरी मां तवाफ कर रही थीं तब पापा उसके पीछे खड़े होकर उसकी रक्षा कर रहे थे.

@NewtmasGrape हैंडल के किसी ने लिखा कि जब वह मात्र 10 साल की उम्र में थीं तब एख मस्जिद में एक व्यक्ति ने पीछे से उनके अंगों को बुरी तरह से दबोचा था.

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