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परमात्मा के प्रथम दर्शन पुण्य एवं शक्तिदायक : ब्रम्हर्षि गुरुदेव ‘

पार्श्व स्वर्ण मंदिर के प्रतिष्ठा महोत्सव बाद हुआ ‘द्वारोद्घाटन ‘
महाशिवरात्रि महोत्सव के चार प्रहर की विशेष पूजा मंगलवार को
तिरुपति (छोटीकाशी डॉट कॉम ब्यूरो)। सिद्धेश्वर ब्रम्हर्षि गुरुदेव ने कहा कि नूतन मंदिर में विधि-विधान से प्रतिष्ठापित की जाने वाली परमात्मा की प्रतिमा के प्रथम दर्शन पुण्यदायक एवं शक्तिप्रदायक होते हैं।
उन्होंने इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालूओं से कहा कि इन दर्शनों को अपने जीवन में संजोकर रखना है तथा धर्म, कर्म, दान और पुरुषार्थ के कार्य करते हुए अपने मनुष्य भव को भाग्यशाली बनाना है। गुरुदेव ने आत्मा को ऊपर उठाने वाले मार्ग पर बढऩे की सीख देते हुए कहा कि मोह का भी क्षय करना होगा, तभी लाखों-करोड़ों योनियों में भटकती हुई आत्मा मोक्ष को प्राप्त करेगी। वे यहां सी रामापुरम स्थित सिद्धेश्वर तीर्थ ब्रम्हर्षि आश्रम में नवनिर्मित श्री ब्रम्हेश्वर जीरावला पार्श्वनाथ स्वर्ण मंदिर के प्रतिष्ठा महामहोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को द्वारोद्घाटन ‘परमात्मा के प्रथम दर्शन ‘ बाद अपना उद्बोधन दे रहे थे।
उल्लेखनीय है कि एक दिवस पूर्व ब्रम्हर्षि गुरुदेव के सानिध्य में एवं आचार्यश्री रत्नाकरसूरीश्वरजी व साध्वी श्री संयमलताजी की निश्रा में यहां वृहद् शांतिस्नात्र पूजा हुई तत्पश्चात् शिखरबद्ध भव्यातिभव्य जिनालय की अंजनशलाका व सुवर्ण कलश तथा शिखर ध्वजारोहण विधि-विधान से संपन्न हुआ।
शाम के सत्र में अनेक कलाकारों ने प्रभु भक्ति की भजन संध्या में प्रस्तुतियां दीं व विभिन्न चढ़ावे की बोलियों का श्रद्धालूओं ने लाभ लिया। गुरुदेव ने अपने हृदयस्पर्शी प्रवचन में कहा कि मंदिर का ध्वजारोहण भक्तों में नई और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, प्रतिदिन भगवान की भक्ति करने व समय का सदुपयोग करने की पे्ररणा देते हुए संतश्री ने कहा कि व्यक्ति के लिए राष्ट्र व समाज के निर्माण में भी सहभागिता और भारत की संस्कृत व सभ्यता की सुरक्षा भी जरुरी है। दार्शनिक संत ओशो के एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए गुरुदेवश्री ने कहा कि असत्य के तर्क से नर्क की यात्रा आसान हो सकती है, लेकिन सत्य का तर्क भगवान से मिला देता है। उन्होंने कहा कि आस्था और विश्वास में बहुत शक्ति होती है, सांसारिक व्यक्ति को परमात्मा से मिलने के लिए गुरु के द्वार आना जरुरी है और जो गुरु के द्वार आ गया तथा जिसने सत्य पर विश्वास कर लिया वही जीवन में कुछ प्राप्त भी कर सकता है।
आश्रम के मीडिया प्रभारी प्रकाश सेठिया ने बताया कि इस अवसर पर आचार्यश्री ने भी अपने विचार रखे व अन्य संतों ने भजनों की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में देश और दुनिया के अनेक शहरों से श्रद्धालूओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ शिरकत की। आयोजन के बाद आचार्यवंृंद एवं साध्वीश्री की वैयावप विहार सेवा का लाभ आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम मोदी, संयोजक भूपेंद्र जैन व ललित शर्मा सहित अनेक भक्तों ने लिया। साथ ही सेठिया ने बताया कि मंगलवार को आश्रम में महाशिवरात्रि महोत्सव ब्रम्हर्षि गुरुदेव के सानिध्य में मनाया जाएगा। यहां ध्यान मंदिर में प्रतिष्ठापित चमत्कारिक श्री ब्रम्हेश्वर महादेव का अभिषेक व चार प्रहर की पूजा आचार्यश्री श्रीनिवास श्रीमाली के माध्यम से अनेक विप्र पंडितों द्वारा करवायी जाएगी। इससे पहले प्रात: 9 बजे से कालसर्प-राहुकेतू दोष निवारण पूजन होगा तथा मध्यान्ह दो बजे से गौपूजा व गौदान
का कार्यक्रम होगा।
मीडिया प्रभारी बिन्नू तंवर ने बताया कि महाशिवरात्रि महोत्सव के अध्यक्ष गोपाल सिंह राजपुरोहित के निर्देशन में तैयारियों को अंतिम रुप दिया गया। आश्रम परिसर के विशाल माता हॉल में कैलाश पर्वत की विहंगम रोशनीमय झांकी सजायी गयी है। उधर बेंगलूरू से गुरुभक्तों के संघ ने तिरुपति में महाशिवरात्रि महोत्सव में शामिल होने के लिए सोमवार रात्रि को विभिन्न स्थानों से 21 बसों व अनेक वाहनों के माध्यम से प्रस्थान किया।
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