धर्म-ज्योतिष

फाल्गुन कृष्ण द्वादशी पर बन रहा खास योग, पर्स में रखें ये चीज…कभी नहीं होगी पैसे की कमी

 सोमवार दिनांक 12.02.18 पर फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि होने के निमित बन रहे सिद्धि योग में प्रथम रुद्रावतार वीरभद्र का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। शिव महापुराण, देवसंहिता व स्कंद पुराण में वर्णित शिव-पार्वती संवाद के अनुसार कालांतर में ब्रह्मदेव के पुत्र दक्षप्रजापति अपनी पुत्री सती व महादेव के विवाह से दुखी थे।

दक्ष ने हरिद्वार के कनखल में महायज्ञ के आयोजन पर अपने दामाद महादेव को आमंत्रित नहीं किया। यज्ञ की बात ज्ञात होने पर सती बिना महादेव के ही वहां चली गई। अपने पिता के घर जब उन्होंने महादेव व स्वयं का अपमान अनुभव किया तो उन्हें क्रोधवश यज्ञवेदी में कूदकर अपनी देह त्याग दी।

शास्त्र श्रीमद् भागवत अनुसार सती के प्राण त्यागने से दु:खी महादेव ने उग्र रूप धारण कर क्रोध में अपने होंठ चबाते हुए बिजली व आग की लपट के समान दीप्त हो रही अपनी एक जटा उखाड़ कर पृथ्वी पर पटक दी जिसस महाभयंकर वीरभद्र प्रकट हुए। महादेव की आज्ञा पर वीरभद्र ने महायज्ञ का विध्वंस कर व दक्ष को परास्त कर उसका मस्तक काटकर मृत्युदंड दिया। वीरभद्र के विशेष पूजन व उपाय से शत्रुओं का नाश होता है, मुश्किलें समाप्त होती हैं व मान-सम्मान प्राप्त होता है।

पूजन विधि: 
वीरभद्र या महादेव के चित्र का विधिवत दशोपचार पूजन करें। गौघृत का दीपक करें, चंदन से धूप करें, सफेद कनेर के फूल चढ़ाएं। श्वेत चंदन चढ़ाएं, खीर का भोग लगाएं, तथा सफेद चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद स्वरूप वितरित करें।

पूजन मुहूर्त: 
शाम 18:05 से शाम 19::05 तक।

पूजन मंत्र: 
ॐ ह्रौं हूं वं वीरभद्राय नमः॥

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