धर्म-ज्योतिष

*:-शिव की पावन रात्रि कब मनायी जायेगी:-*

Jyotish Sashikant Pandey: ज्योतिर्विद पं० शशिकान्त पाण्डेय (दैवज्ञ)
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फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व है। शिवरात्रि के संदर्भ में इस बार दिनांक 13 फरवरी और 14 फरवरी 2018 में द्वंद की स्थिति बन रही है,जिसके निवारण के संदर्भ में निर्णय सिन्धु में शिवरात्रि के विषय में निर्णय करते हुए पद्म पुराण में कहा गया है कि *“अर्धरात्रात्परस्ताच्चेज्जयायोगो यदा भवेत,पूर्वविद्धैव कर्तव्या शिवरात्रि: शिवप्रियै:”* फाल्गुन मास के आधी रात से प्रथम यदि जया का योग हो तो वह शिव के भक्तों को पूर्वविद्धा हीं चतुर्दशी सदैव करनी चाहिये।
*स्कन्दपुराण में भी कहा है*
कि यदि
*“भवेद्यत्र त्रयोदश्याम भूतव्यापता महानिशा शिवरात्रि व्रतम तत्र कुर्याज्जागरणम* तथा”।
अर्थात यदि त्रयोदशी आधी रात में चतुर्दशी हो तो उसमें शिवरात्रि व्रत और जागरण करना चाहिये,इसके करने वाले मनुष्यों के महा पापों की शान्ति होती है।लिंग पुराण के कथनानुसार फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को सावधान होकर जो महादेव की पूजा करते हैं,उन्हें प्रभु सदैव मुक्त और रोग रहित और परम स्थान देते है।
ईशान संहिता के अनुसार “व्याप्यार्धरात्रम यस्यां तु लभ्यते,या चतुर्दशी तस्यामेव व्रतम कार्यम मत्प्रासदार्थिर्भिनरै:। जिस तिथि में आधी रात के समय :चतुर्दशी मिले उसमें ही प्रभु की प्रसन्नता की कामना वाले मनुष्य व्रत करें।
निर्णयामृत के अनुसार कि “सभी शिवरात्रि प्रदोषव्यापिनी लेनी चाहिये”।
इन निर्णय सिन्धु के निर्णय के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की परम पावन शिवरात्रि दिनाँक 13 फरवरी दिन मंगलवार को मनायी जायेगी।
[2/10, 7:3: फाल्गुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि होती है। परन्तु इसके निर्णय के प्रसंग में कुछ आचार्य प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी तो कुछ निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी में महाशिवरात्रि मानते है। परन्तु अधिक वचन निशीथ व्यापिनी चतुर्दशी के पक्ष में ही प्राप्त होते है। कुछ आचार्यों जिन्होने प्रदोष काल व्यापिनी को स्वीकार किया है वहाॅं उन्होने प्रदोष का अर्थ ‘अत्र प्रदोषो रात्रिः’ कहते हुए रात्रिकाल किया है। ईशान संहिता में स्पष्ट वर्णित है *कि ‘‘ फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्याम् आदि देवो महानिशि।* *शिवलिंगतयोद्भूतः कोटिसूर्यसमप्रभः।।* *तत्कालव्यापिनी ग्राहृा शिवरात्रिव्रते तिथिः।।’* फाल्गुनकृष्ण चतुर्दशी की मध्यरात्रि में आदिदेव भगवान शिव लिंग रूप में अमितप्रभा के साथ उद्- भूूूत हुए अतः अर्धरात्रि से युक्त चतुर्दशी ही शिवरात्रि व्रत में ग्राहृा है।
 धर्मशास्त्रीय उक्त वचनों के अनुसार इस वर्ष दिनांक 13/02/2018 ई. को चतुर्दशी का आरम्भ रात्रि 10ः 22 बजे हो रहा है तथा इसकी समाप्ति अग्रिम दिन दिनांक 14/02/2018 ई. को रात्रि 12: 17 मिनट पर हो रही है। अतः ‘एकैक व्याप्तौ तु निशीथ निर्णयः’’ इस धर्मशास्त्रीय वचन के अनुसार चतुर्दशी 13 फरवरी को निशीथ काल एवं 14 फरवरी को प्रदोष काल में प्राप्त हो रही है ऐसे स्थिति में निशीथ के द्वारा ही इस वर्ष शिवरात्रि का निर्णय किया जाएगा। निशीथ का अर्थ सामान्यतया लोग अर्धरात्रि कहते हुए 12 बजे रात्रि से लेते है परन्तु निशीथ काल निर्णय हेतु भी दो वचन मिलते है माधव ने कहा है कि रात्रिकालिक चार प्रहरों में द्वितीय प्रहर की अन्त्य घटी एवं तृतीय प्रहर के आदि की एक घटी को मिलाकर दो घटी निशीथ काल होते है। मतान्तर से रात्रि कालिक पन्द्रह मुहूर्त्तो्ं में आठवां मुहूर्त निशीथ काल होता है।
 अतः इस वर्ष 13 फरवरी को निशीथकाल 11: 34:30 से 12: 26: 00 तक तथा 14 फरवरी 11:35:38 से 12:27:02  तक तथा प्रमाणान्तर दोनों दिवसों में रात्रि 11 बजे से 01 बजे तक हो रहा है। अतः ‘‘ पूरे द्युः प्रागुक्तार्धरात्रस्यैकदेशव्याप्तौ पूर्वेद्युः ’’ वचन के अनुसार 14 फरवरी को (रात्रि 11:35:38 से 12: 27: 02 बजे तक) पूर्ण निशीथ काल के पूर्व 12:17 मिनट पर चतुर्दशी समाप्त हो जाने से पूर्ण निशीथ व्यापिनी नहीं मानी जा सकती। अत एव स्पष्ट से धर्मशास्त्रीय वचनानुसार दिनांक 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि व्रतोत्सव मनाया जाएगा। इसी आशय से काशी के महत्वपूर्ण पंचाङगो मे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित श्रीविश्वपञ्चाग एवं शिवमूर्ति हृषीकेशपंचांगो आदि में भी दिनांक 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि लिखा गया है।
*अत: दिनांक 13 फरवरी को ही महाशिवरात्रि  मनायी जायेगी*
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[12/02, 07:10] Jyotish Sashikant Pandey: ज्योतिर्विद पं० शशिकान्त पाण्डेय (दैवज्ञ)
9930421132 🚩🚩🚩🚩🚩🕉🚩🚩🚩🚩🚩
🌹  *जय जय श्री राधे राधे जी*  👏
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