धर्म-ज्योतिष

क्या पाडंवों की वजह से ही उनकी बहन दुशाला हुई थी विधवा

महाभारत की कहानी के बारे में तो आप जानते ही होंगे. इस कहानी में पांडवों और कौरवों का युद्ध हुआ था. द्रोपदी के सम्मान और अपने राज्य के लिए पांडवों ने कौरवों से युद्ध किया, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपने शायद ही कभी सुना होगा. ये कहानी है पांडवों और कौरवों की इकलौती बहन दुशाला के बारे में.

जीहां आपने सही सुना दुशाला पाडंवों और कौरवों की इकलौती बहन थी. लेकिन क्या आपको पता है कि इन्हीं पांडवों के कारण ही उनकी बहन विधवा हुई थी. तो आइए आपको बताते हैं दुशाला के बारे में पूरी कहानी.

आपको बता दें कि ‘दुशाला’, कौरवों और पांडवों की बहन थी और धृतराष्ट्र और गांधारी की बेटी थी. वो बचपन से ही अपने सभी भाइयों और माता पिता की चहेती थी. लेकिन उसे ये अंदाजा नहीं था कि शादी के बाद उसके साथ क्या होने वाला है. उसके बड़े होने पर उसका विवाह सिंधु राज्य के राजा जयद्रथ के साथ कर दिया गया. जयद्रथ को उसकी शूरवीरता के लिए तो जाना ही जाता था, साथ ही उसे उसके दोहरे व्यक्तित्व के लिए भी जाना जाता था.

इसका मतलब ये कि कभी वो महिलाओं से बहुत अच्छा व्यवहार करता था तो कभी उनके लिए बिल्कुल क्रूर हो जाता था और उसके लिए महिलाओं के दिल में बुरी छवि बन जाती थी. जयद्रथ के इस व्यवहार की वजह से दुशाला भी काफी दुखी रहती थी.

द्रौपदी का किया था अपहरण

जयद्रथ ने अपने इसी दोहरे व्यक्तित्व के चलते मानवता की सारी हदें पार कर दीं और पांडवों की पत्नी ‘द्रौपदी’ का अपहरण कर लिया. जयद्रथ की इस हरकत से पांडवों को बहुत क्रोध आया, जिसके बाद वो द्रोपदी को बचाने के लिए निकल पड़े. पांडव क्रोध की अग्नि में जल रहे थे. जब उन्होंने जयद्रथ को पकड़ा तो वो उसका सिर धड़ से अलग करना चाहते थे. लेकिन उस समय द्रोपदी ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया.

द्रौपदी ने ही बचाया था दुशाला का सुहाग

द्रौपदी ने पांडवों को ये कह कर रोक लिया कि वो जयद्रथ उनकी बहन का पति है और ऐसा करने से उनकी इकलौती बहन विधवा हो जाएगी. पांडवों ने द्रोपदी की बात मान ली और जयद्रथ को गंजा करवा कर छोड़ दिया. लेकिन इस घटना के बाद जयद्रथ बहुत सी शर्मशार हो गया और अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए भगवान शिव की तपस्या में लीन हो गया.

उसकी तपस्या से भगवान शिव उसपर प्रसन्न हो गए और उसे वरदान देने के लिए प्रकट हो गए. लेकिन इसके बाद भी जयद्रथ के दिल में बदले की भावना घर कर गई थी. कुछ समय बीतने के बाद जब दुर्योधन और अन्य कौरवों ने अपनी सेना के साथ पांडवों से लड़ाई छेड़ दी तो जयद्रथ कौरवों के साथ शामिल हो गया.

जयद्रथ ने की अभिमन्यु की हत्या

जयद्रथ ने कौरवों का आमंत्रण स्वीकार कर लिया और युद्ध में कौरवों का साथ देने के लिए पहुंच गया. महाभारत के युद्ध के दौरान जब अर्जुन का बेटा अभिमन्यु चक्रव्युह में फंस गया तो जयद्रथ ने उसकी धोखे से हत्या कर दी. इसके बाद जब पांडवों को इस बात का पता चला तो अर्जुन ने उसे जान से मारने की प्रतिज्ञा कर ली और उन्होंने श्रीकृष्ण की मदद से जयद्रथ का सिर धड़ से अलग कर दिया.

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