धर्म-ज्योतिष

जन्म से लेकर अंत समय तक इन 6 खास जगहों पर बीता था श्रीकृष्ण का जीवन, आज तक दीखते चमत्कार

: भगवान श्रीकृष्ण कई सालों तक धरती पर मनुष्य रूप में रहे और यहां कई लीलाएं की। इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने कई जगहों पर अपने जीवन का खास समय बिताया था। कहीं भी उन्होंने जन्म लिया तो कहीं पर शिक्षा पाई। किसी तरह पर उनका मुंडन हुआ था तो किसी जगह पर उन्होंने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था।

भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्त ये जानना चाहते हैं कि श्रीकृष्ण से जीवन से जुड़ी वे सभी खास जगहें आज कहां है और किस रूप में मौजूद है। इस स्टोरी में हम आपको भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी 6 ऐसी ही खास जगहों के बारे में बताने वाले हैं-

मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि-

यह है मथुरा स्‍थित भगवान श्रीकृष्‍ण की जन्मस्‍थली। यहीं कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्म हुआ था। अब यहां कारागार तो नहीं है लेकिन अंदर का नजारा इस तरह बनाया गया है कि आपको लगेगा कि हां यहीं पैदा हुए थे श्री कृष्‍ण। यहां एक हॉल में ऊंचा चबूतरा बना हुआ है कहते हैं यह चबूतरा उसी स्‍थान पर है जहां श्री कृष्‍ण ने धरती पर पहला कदम रखा था। श्रद्धालु इसी चबूतरे से सिर टिकाकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

नंद गाव में बना नंदराय मंदिर-

यह है नंद गांव स्‍थित नंदराय का मंदिर। कंस के भय से वसुदेव जी यहीं नंदराय और माता यशोदा के पास श्री कृष्‍ण को छोड़ गए थे। यहां नंदराय जी का निवास था और श्री कृष्‍णका बालपन गुजरा था। आज यहां भव्य मंदिर है, यहीं पास में एक सरोवर है जिसे पावन सरोवर कहते हैं। माना जाता है कि इसी सरोवर में माता यशोदा श्री कृष्‍ण को स्नान कराया करती थीं।

कुरुक्षेत्र का भद्रकाली मंदिर-

हरियाण के कुरुक्षेत्र में स्‍थित भद्रकाली मंदिर के बारे में माना जाता है कि यह एक शक्तिपीठ है। यहां पर भगवान श्रीकृष्‍ण और बलराम का मुंडन हुआ था। यहां आज भी भगवान श्रीकृष्ण के पद्चिन्ह मौजूद हैं। यहां श्रीकृष्ण के उन्हीं पद्चिन्हों और गाय के पांच खुरों के प्राकृतिक चिन्हों की पूजा की जाती है।

उज्जैन का सांदीपनि आश्रम-

यह है मध्यप्रदेश के उज्जैन के पास स्‍थित सांदीपनि आश्रम। यहीं पर भगवान श्रीकृष्‍ण ने बलराम और सुदामा के साथ गुरू सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त किया था। कहते हैं यहीं पर श्रीकृष्‍ण ने भगवान परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था। उन दिनों यहां ऋषि आश्रम हुआ करता था, लेकिन अब यहां श्री कृष्‍ण का मंदिर है जहां श्रीकृष्‍ण के साथ बलराम जी और सांदीपनि जी भी मौजूद हैं।

गुजरात का द्वारकाधीश मंदिर-

यह है गुजरात स्‍थित द्वारिकाधीश मंदिर। मथुरा छोड़कर श्री कृष्‍ण ने यहां अपनी नगरी बसाई थी। सागर तट पर बना यह मंदिर द्वारिकाधीश श्रीकृष्‍ण का राजमहल माना जाता है। आज यह स्‍थान विष्‍णु भक्तों के लिए मोक्ष का द्वार माना जाता है। आसमान को छूता मंदिर का ध्वज श्री कृष्‍ण की विशालता को दर्शाता है।

कुरुक्षेत्र का ज्योतिसर तीर्थ-

कुरुक्षेत्र में जहां श्री कृष्‍ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। आज वह स्‍थान ज्योतिसर और गीता उपदेश स्‍थल के नाम से जाना जाता है। यहीं पर पीपल के वृक्ष के नीचे श्री कृष्‍ण ने अमर गीता का ज्ञान दिया था। यहां आज भी वह पीपल का वह पेड़ मौजूद है, जिसके नीचे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

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