धर्म-ज्योतिष

महिला पर बुरी नजर रखने वाले को मिलती है क्या सजा, इस कथा में पता चलेगा

इन दिनों महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में काफी इजाफा हुआ है. महिला के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि ये काम सिर्फ इसी समय में ही होता है. पुराने समय यानी सतयुग और त्रेतायुग में भी ऐसी घटनाएं होती थीं, हालांकि अंतर इतना था कि उस समय महिला को कुछ समय दिया जाता था कि वो उसका अपहरण करने वाले पुरुष को खुद ही अपना ले. अगर दिए गए समय में वो ऐसा नहीं करती थी तो उसे मृत्यु दंड दे दिया जाता था.

हालांकि उस युग में महिलाओं का बहुत सम्मान भी किया जाता था और उनको देवी की तरह ही पूजा जाता था. आपको बता दें कि शास्त्रों के अनुसार जो महिला को बुरी नजर से देखता है, उसे बहुत की कड़ी सजा दी जाती है. तो आज हम आपको रामायण काल से जुड़ी एक कथा बता रहे हैं जिससे आपको पता चलेगा के किसी महिला को बुरी नजर से देखने पर क्या दंड दिया जाता है.

राजा बाली की शक्ति

रामायण में आपने सुग्रीव के भाई बाली के बारे में तो सुना ही होगा. जीहां वही राजा बाली जो वानरों का राजा था. उसके बारे में आपने बहुत सी बातें सुनी होंगी. आपको ये तो पता ही होगा कि राजा बाली को ये वरदान मिला था कि उसके सामने कोई भी व्यक्ति युद्ध के लिए आएगा तो विरोधी की आधी शक्ति उसमें आ जाएगी.

अब बाली की शक्ति का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि उसने रावण को भी अपने सामने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था और उसे बाली से हार का सामन करना पड़ा. ये तो आपको पता ही है कि बाली के भाई सुग्रीव भगवान राम के बेहद करीबी और परम मित्र थे. जब सुग्रीव ने अपना राज्या वापस पाने के लिए बाली को ललकारा तो भगवान राम वहीं मौजूद थे.

वहां मौजूद होकर वो देख रहे थे कि बाली सुग्रीव का अंत करने वाले हैं, तभी उन्होंने छिपकर बाली पर तीर चलाया और तीर लगने से घायल हो गए और जमीन पर गिर पड़े.

बाली ने किया राम से सवाल

जब बाली घायल होकर जमीन पर गिर पड़े तब भगवान राम उनके पास आए. तब बाली ने उनसे एक सवाल पूछा कि ‘आप तो धर्म की रक्षा करते हैं फिर मुझे इस प्रकार छिपकर तीर क्यों मारा?’ बाली के इस सवाल का श्रीराम ने जवाब दिया कि “अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी।। इन्हहि कुदृष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधें कछु पाप ना होई।।”

इसका मतलब ये कि छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्र की पत्नी और पुत्री सब समान होती है. यदि कोई पुरुष इन पर बुरी नजर डालता है तो उन्हें अगर ऐसे मारा जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं है. चूंकि तूने (बाली ने) अपने छोटे भाई सुग्रीव की पत्नी पर बुरी नजर रखी और सुग्रीव को मारना चाहा, इसी वजह से ऐसा हुआ.

इसके बाद अपने इस काम के लिए बाली ने श्रीराम और सुग्रीव से मांफी मांगी और फिर उसका देहांत हो गया. जब बाली की मृत्यु हो गई तो बाली की पत्नी तारा रोने लगी. तारा को दुखी देखकर श्रीराम ने कहा कि “बाली का शरीर तुम्हारे सामने सोया है, लेकिन उसकी आत्मा अमर है. भगवान राम की ये बात सुनकर तारा शांत हुई और उसने भगवान से आशीर्वाद लिया.” इस सारे घटनाक्रम के बाद श्रीराम ने सुग्रीव को पूरा राजपाट सौंप दिया.

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