बीकानेर

बीकानेर में दुर्लभ जन्तुओं एवं चित्रकला की प्रदर्शनी का शुभारम्भ

बीकानेर, (छोटीकाशी डॉट कॉम ब्यूरो)। बीकानेर सम्भाग के सबसे बड़े राजकीय डूंगर कॉलेज में सोमवार को प्राणीशास्त्र विभाग में दुर्लभ जंतुओं के संग्रह एवं चित्रकला विभाग में विभिन्न प्रकार के चित्रों का प्रदर्शन किया गया। मीडिया प्रभारी डॉ. राजेन्द्र पुरोहित ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्घाटन प्राचार्य डॉ. बेला भनोत, उपाचार्य डॉ. सतीश कौशिक एवं सहायक निदेशक डॉ. दिग्विजय सिंह ने किया। उल्लेखनीय है कि 15 से 22 जनवरी तक प्राणीशास्त्र विभाग की प्रभारी डॉ. मीरा श्रीवास्तव एवं डॉ. कैलाश स्वामी के नेतृत्व में एक 35 सदस्यी दल गुजरात के ओखा, वेरावल, द्वारिका, सोमनाथ, नरेरा, गिर फ ोरेस्ट तथा राजकोट आदि स्थानों का भ्रमण किया। इस भ्रमण के दौरान प्राणीशास्त्र के विद्यार्थियों ने लॉब्स्टर केकड़ा, सीपिया, क्रो फिश, चाकसी, गोखर गुल्ला, सिगली, पल्ला, फ्लेट फि श, एक्सोसीट्स, फ ासा तथा किस्सी आदि दुर्लभ मछलियों का संग्रह किया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने कछुओं के संवर्धन, सूखी मछलियों के पाउडर बनाने, मछलियों को बेहद कम तापमान पर संरक्षित करने संबंधी केन्दों का दौरा कर नवीनतम जानकारी हासिल की। डॉ. मीरा श्रीवास्तव ने बताया कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण न केवल स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम का एक हिस्सा है बल्कि इस प्रकार के भ्रमण से विद्यार्थियों को जंतुओं की प्राकृतिक वास स्थान के बारे में जानकारी मिलती है। सोमवार को ही चित्रकला विभाग में विभिन्न चित्रों को प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शाया गया। प्रदर्शनी संयोजक डॉ. सतीश गुप्ता ने बताया चित्रकला प्रदर्शनी में प्रकृति संबंधी चित्र, स्वयं पर कार्य करने का विश्वास, जल चित्र तथा अमूर्त कला एवं यथार्थवादी चित्रों का प्रदर्शन किया गया। डॉ. गुप्ता ने बताया कि साहित्य की भांति चित्रकला भी एक दृश्य भाषा है। यह विश्वव्यापी भाषा है। किसी भी देश का व्यक्ति इसे समझ सकता है। उन्होनें बताया कि भारत में कला की बजाय शिल्प को ही महत्व दिया जाता है। इस प्रदर्शनी में डॉ. अनिल अरोड़ा एवं डॉ. प्रताप सिंह के पीली आंख वाला कबूतर, सफेद भौहें वाली चिडिय़ा, अंकित के राजस्थानी कला चित्र, आशीष पुरोंहित के प्रकृति चित्र तथा बलवीर के जूनागढ़ का भूमि चित्रण आदि विशेष आकर्षण का केन्द्र रहे। विभागाध्यक्ष डॉ. इन्द्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि विभाग प्रतिवर्ष विद्यार्थियों की सृजनात्मक क्षमता एवचं रूचि के विकास के लिये इस प्रकार कीे प्रदर्शनी आयोजित करता है।

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