जयपुर

पीएलएफ 2018 : साहित्य के लिए भाषा का हथियार होना जरूरी – रामस्वरूप किसान

जयपुर। लेखक रामस्वरूप किसान का कहना है कि साहित्य के लिए भाषा का हथियार होना जरूरी है। समानांतर साहित्य उत्सव-2018 के दूसरे दिन लेखक से मिलिये कार्यक्रम में रामस्वरूप किसान ने कहा कि भाषा के जरिये ही साहित्य को मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जैसे हिन्दी हमारी मातृभाषा है, लेकिन साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की हिन्दी अलग थी, हजारी प्रसाद द्विवेदी की हिन्दी अलग थी, भले ही हिन्दी को लिखने का तरीका अलग-अलग था, लेकिन भाषा एक ही थी वह थी हिन्दी। रामस्वरूप किसान ने कहा कि कथेसर पत्रिका के जरिये वह नए कहानीकारों को जगह देते है, और हर बार नये कहानीकार को अपने साथ जोड़ते है। उन्होंने कहा कि संपादक को खोजी होना चाहिए. जो नए रचनाकार खोज सके।

लेखक रामस्वरूप किसान ने यह भी कहा कि अगर वह किसान नहीं होते तो वह रचनाकार भी नहीं होते। लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब वक्त आ गया है कि लेखक अपनी किताबों की मार्केटिंग पर जोर दे। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि राजस्थानी साहित्य को अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर उचित स्थान नहीं मिल पाता है। इसके पीछे की मुख्य वजह राजस्थानी साहित्य की समीक्षा नहीं होना है। लेखक रामस्वरूप किसान का कहना है कि कुछ लोग राजस्थानी साहित्य को आगे नहीं देखना चाहते है।

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