राजस्थान

मकर संक्रांति आज: आसमान में पतंगों के पेंच, दान-धर्म में लगे लोग

जयपुर। शहर में मकर संक्रांति का पर्व आज हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। अल सुबह ही लोग छतों पर चढ़़ गए। सुबह के वक्त कोहरा छाया हुआ था, लेकिन कोहरे से ज्यादा पतंगों का उत्साह था। दूसरी ओर मकर संक्रांति पर स्नान, दान-पुण्य, तप, जप और अनुष्ठान का अत्यधिक महत्व है। शहरवासी सुबह से दान-पुण्य करने निकल गए। चौराहों पर भिखारियों को खाना-कपड़े दान दिए गए। कबूतरों को दाना डालते हुए और चींटियों को आटा डालते हुए भी लोगों को देखा गया।

मकर संक्रांति पर इसलिए उड़ाई जाती हैं पतंगें

हम इंतजार करते हैं मकर संक्रांति आएगी तब पतंग उड़ाएंगे। रात में ही पतंगों में तंग डाल लेते हैं। सुबह उठते पहले छत पर पहुंच जाते हैं। लेकिन कभी सोचा है संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से पतंगों का क्या कनेक्शन है। इसका कोई धार्मिक कारण कहीं नहीं मिलेगा। कारण यह है कि संक्रांति पर सूर्य के उत्तरायण होने से इसकी उज्ज्वल किरणें सीधे हमारे शरीर में प्रवेश करें। ये तरंगे हमारे शरीर के लिए किसी औषधि से कम नहीं होतीं। पतंग उड़ाते वक्त हमारी निगाह आसमान में रहती हैं। शरीर सीधे सूर्य के संपर्क में रहता है। सूर्य की किरणों से सर्दी जनित रोगों का नाश होता है। तिल का सेवन करने से भी गर्मी उत्पन होती है। छत पर खड़े-खड़े तिल के लड्‌डू खाते जाएं, पतंगों के पेंच लड़ाते जाएं और रोगों को दूर भगाएं। लेकिन छत पर जाएं तो नहा-धोकर जाएं।

सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 

आज के दिन सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन को मकर संक्रांति कहते हैं। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा गया है।

 

इसलिए है दानपुण्य का महत्व

आज के दिन सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया है। सूर्य के पुत्र हैं शनिदेव। मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं। सूर्य से शनिदेव का पुत्र होते हुए भी बैर भाव है। सूर्य को शनि कष्ट न दें, इसलिए दानपुण्य किया जाता है। दान करने से कष्ट में कटौती होती है। तिल का दान का खास महत्व होता है।

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