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जज विवाद: चारों जजों के समर्थन में उतरे यशवंत सिन्हा, कहा- अगर जजों ने कहा है कि प्रजातंत्र खतरे में है तो ये हम सब के लिए चिंता का विषय होना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के साथ मतभेदों पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने शनिवार (13 जनवरी) को नोएडा में अपने निवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि, यह हमारा कर्तव्य है कि हम जजों द्वारा उठाए गए सवालों पर विचार करें।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि, अगर चार सीनियर जज पब्लिक में अपनी बात कह रहे हैं तो यह केवल सुप्रीम कोर्ट का मामला कैसे हो सकता है। यह गंभीर मामला है, जिन लोगों को देश के भविष्य और लोकतंत्र की चिंता है, उन्हें इस मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए। अगर न्यायपालिका के साथ समझौता होगा, तो इसका दुष्परिणाम सभी पर पड़ेगा।

लोग डर की वजह से बोल नहीं पा रहे हैं। सिन्हा ने कहा कि कुछ मंत्री भी इस मामले में चुप हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अगर उन्होंने कुछ बोला तो उनकी कुर्सी जा सकती है। साथ ही यशवंत सिन्हा ने कहा कि, CJI को सभी सीनियर जज की बैठक करनी चाहिए और जो मुद्दे उठे हैं उन पर बात कर किसी सहमति पर पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा, यदि न्यायाधीश कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है, तो सबसे अधिक चिंतित कौन होना चाहिए? क्या इस देश की राजनीतिक दलों को सबसे ज्यादा चिंतित नहीं होना चाहिए? आगे उन्होंने कहा कि, ‘मैं यह नहीं कहता कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट से आगे जाकर कोई एक्शन लेना चाहिए, बल्कि मैं यह कहना चाहता हूं कि सरकार को लोकतंत्र की रक्षा में अपनी भूमिका का पालन गंभीरता से करना चाहिए।’
यशवंत सिन्हा ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों, सत्ताधारी सरकार और चुने हुए प्रतिनिधियों को इसकी चिंता करनी चाहिए। बता दें कि, इस मामले को बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने शुक्रवार को न्यायपालिका का आंतरिक मसला बताया था।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और वकीलों से मुलाकात के बाद कहा कि यह बहुत संवेदनशील मामला है, चार जजों ने जो मुद्दे उठाए हैं वो बहुत महत्वपूर्ण है। जजों ने कहा कि लोकतंत्र खतरे में है इस पर ध्यान देने की जरूरत है।’

बता दें कि, आजाद भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार मौजूदा जजों ने शुक्रवार (12 जनवरी) को मीडिया के सामने आकर देश के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए।
वरिष्ठ जस्टिस चेलामेश्वर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, “हम चारों के लिए यह बहुत तकलीफ से भरा समय है और यह प्रेस कॉन्फ्रेंस करने में हमें कोई खुशी नहीं हो रही।” उन्होंने कहा कि, “हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई कहे कि चारों जजों ने अपनी आत्मा बेच दी थी।” उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और बीते दिनों में बहुत कुछ हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने न्यायपालिका से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मीडिया से बात की।

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