विदेश

जब लोकतंत्र बचाने के लिए जब सड़क पर उतर आए थे पाकिस्तान के चीफ जस्टिस

उस समय चौधरी ने इस्‍तीफा देने से मना कर दिया था। उन्‍होंने राष्‍ट्रपति की बात को मानने से ना केवल मना किया बल्कि इसके खिलाफ आवाज भी उठाई। उनके सपोर्ट में पाकिस्‍तानी वकील भी आ गए थे।

ये एक मूवमेंट बन गया था और न्‍यायिक स्‍वतंत्रता की मांग की जाने लगी। चौधरी की एक आवाज पर लाेग सड़कों पर उतर गए थे। इसे लोकतंत्र बचाने की मुहिम कहा गया।

रोष इस बात को लेकर भी था कि चौधरी पर गलत व्यवहार करने और पद के दुरुपयोग का आरोप लगाकर इस्‍तीफा मांगा जा रहा था। पर चौधरी के मना कर देने पर मुशर्रफ सरकार ने उन्‍हें सस्‍पेंड कर दिया।
उस समय चौधरी के निलंबन में लाहौर बार एसोसिएशन और वकीलों के अन्‍य संगठन सड़कों पर उतर आए थे। पुलिस और वकीलों के बीच मुठभेड़ की कई घटनाएं हुईं थीं। निलंबन के बाद वकीलों ने इसे गैर-कानूनी बताया था। पूरे पाकिस्‍तान में अदालतों का बहिष्‍कार किया गया।

जून 2005 में चीफ जस्टिस बने चौधरी का कार्यकाल 2013 में खत्म होना था। इसके बाद परवेज मुशर्रफ की काफी आलोचना हुई थी।

बता दें कि आज भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 सिटिंग जज न्यायपालिका की खामियों की शिकायत लेकर मीडिया के सामने आए हैं। इससे सरकार में हड़कंप मच गया है। सिटिंग जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुंरत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और राज्य मंत्री पीपी चौधरी को तलब किया है।

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