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सावधान! एक दिन में कई लीटर खून पी जाता है ये कीड़ा, कहीं आपके पेट में भी तो नहीं- ऐसे पता करें

4 साल का बच्चा। दो साल से अजीब बीमारी से जूझ रहा था। ख़ून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बार-बार कम होती थी।

बार-बार ख़ून चढ़ाना पड़ता था। वजह सामने नहीं आ रही थी। तरह-तरह के टेस्ट किए गए। सभी टेस्ट नॉर्मल आए। डॉक्टर हैरान-परेशान थे कि ख़ून जा कहां रहा है! 2 साल में तकरीबन 50 यूनिट ख़ून खप गया था शरीर में।
यानी तकरीबन 22 लीटर ख़ून। एक वयस्क आदमी के जिस्म में तकरीबन पांच-साढ़े पांच लीटर ख़ून होता है। इसका मतलब उस बच्चे के शरीर में चार बालिग़ इंसानों के टोटल ख़ून जितना ख़ून गायब हो चुका था। आख़िरकार दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने कैप्सूल एंडोस्कोपी आज़माने का फैसला किया। जो चीज़ सामने आई, उसने सबको दहला कर रख दिया।

क्या-क्या जांच हुई थी?
बच्चे में हो रही लगातार ख़ून की कमी की वजह जानने के लिए कई टेस्ट किए गए। जैसे,ईजीडी टेस्ट: इस टेस्ट में पेट, गले और पेट को जोड़ने वाली नली और छोटी आंत के हिस्से की जांच की जाती है। इसे अपर एंडोस्कोपी भी कहा जाता है। इसमें एक ट्यूब के ऊपर कैमरा लगाकर पेट, नली और छोटी आंत के ऊपरी हिस्से को जांचा जाता है।

कोलोनस्कोपी: इसमें बड़ी आंत की जांच होती है। एक पतले, लंबे ट्यूब से छोटा कैमरा जोड़ कर बड़ी आंत में झांका जाता है।

रेडियोग्राफी: एक्स-रे किरणों की सहायता से भी बच्चे के पेट को जांचा गया था। कई कई बार।

इन तमाम जांचों से कुछ निकलकर नहीं आया। आख़िरकार बच्चे की कैप्सूल एंडोस्कोपी करने का फैसला लिया गया। इसी से मामला खुला।

कैप्सूल एंडोस्कोपी एक तरह से डॉक्टरों का ड्रोन कैमरा है। इसमें एक कैप्सूल में एक वायरलेस कैमरा लगाकर पेट में छोड़ा जाता है। ये कैमरा पेट के अंदर की तस्वीरें लेता रहता है। इस कैमरे की बैट्री 12 घंटे चलती है और ये एक सेकंड में दो फोटो लेता है। बैट्री ख़त्म होने तक ये तकरीबन 70 से 75 हज़ार तस्वीरें खींच लेता है। इन तस्वीरों की रील बनती है, जिसे डॉक्टर्स अपने सिस्टम पर देखते हैं।
इस बच्चे की कैप्सूल एंडोस्कोपी होते ही मामला साफ़ हो गया। डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे के पेट में हज़ारों हुकवर्म मौजूद हैं, जो लगातार उसका ख़ून पीते जा रहे हैं। जितना भी ख़ून बच्चे को चढ़ाया जाता है, कुछ ही दिनों में उनकी भेंट चढ़ जाता है। इसी वजह से बच्चा बार-बार एनीमिया का शिकार हो रहा था।

किसी भी बीमारी से निजात पाने का सबसे पहला कदम उसका सही निदान ही होता है। जैसे ही डॉक्टरों को असली वजह समझ में आ गई, मामला आसान हो गया। हुकवर्म का इलाज है। डॉक्टरों ने हुकवर्म्स की दवाई दी और बच्चा बिल्कुल ठीक हो गया। किसी सर्जरी की भी ज़रूरत नहीं पड़ी।

ये बीमारी अमूमन गंदे पानी के सेवन से होती है। इसीलिए डॉक्टर्स बार-बार जोर देते हैं कि पीने का पानी साफ़ होना चाहिए। उबालकर पिएं तो और बेहतर।

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