रोचक खबरें

प्रोफेसर हर गोविंद खुराना कौन थे, क्यों भारत छोड़कर अमेरिका चले गये ?

गूगल ने डूडल के जरिये भारतीय शख्सियतों को सम्मानित करना भी शुरु कर दिया है. इसी क्रम में आज गूगल में प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक प्रोफेसर हर गोविन्द खुराना को डूडल के जरिये सम्मानित किया है.

हर गोविन्द खुराना को टेस्ट ट्यूब बेबी के परीक्षण करने के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी जाना जाता है. प्रोफेसर हर गोविन्द खुराना के बारे में कुछ बातें

. प्रोफेसर हर गोविन्द खुराना का जन्म 9 जनवरी साल 1922 को पंजाब प्रांत में हुआ था.

हर गोविन्द अपने चार भाई बहनों में सबसे छोटे थे.

. मात्र 12 साल की उम्र में ही हर गोविन्द खुराना के पिता की मृत्यु हो गई. पिता की मृत्यु के बाद इनके बड़े भाई नंदलाल ने हर गोविन्द की पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाली.

हर गोविन्द खुराना की प्रारम्भिक शिक्षा पंजाब के स्थानीय स्कूल में ही हुई.

. प्रोफेसर हर गोविन्द खुराना ने पंजाब विश्वविद्यालय से साल 1943 में बी. एस. सी. ऑनर्स और साल 1945 में एम.एस.सी. ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की.

. एम.एस.सी के बाद भारत सरकार की छात्रवृत्ति के जरिये हर गोविन्द खुराना को उच्च शिक्षा के इंग्लैंड जाने का मौका मिला.

. इंग्लैंड में शोध कार्य पूरा होते-होते हर गोविन्द खुराना को स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में स्थित फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में शोध कार्य के लिए एक बार फिर से छात्रवृत्ति मिली.

. साल 1952 में कनाडा के वैंकोवर स्थित कोलम्बिया विश्वविद्यालय में हर गोविन्द खुराना को जैव रसायन विभाग का अध्यक्ष बना दिया गया.

. कनाडा में रहने के दौरान डॉक्टर खुराना के अनेकों शोधपत्र अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं और शोध- जर्नलों में छपे.

10. साल 1960 में उन्हें कनाडा में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया.

11. कनाडा में ही हर गोविन्द खुराना को से भी सम्मानित किया गया था.

. साल 1960 में डॉक्टर हर गोविन्द खुराना को अमेरिका में स्थित विस्कान्सिन विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ एन्जाइम रिसर्च में प्रोफेसर के पद पर नियुक्त किया गया.

. साल 1966 में हर गोविन्द खुराना ने अमेरिका की नागरिकता ग्रहण कर ली.

. साल 1970 में डॉक्टर खुराना मैसाच्युसेट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर के रुप में अपनी सेवाएं दी. साल 2007 तक उन्होंने इसी संस्थान में कार्य करते हुए अनेकों उपलब्धियों को प्राप्त किया.

. साल 1968 में हर गोविन्द खुराना को जेनेटिक कोड की भाषा को डिकोड करने और उसकी प्रोटीन विश्लेषण में अहम भूमिका बताने के लिए चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गय़ा.

. उस दौर में हर गोविन्द खुराना नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले भारतीय मूल के तीसरे व्यक्ति थे.

. डॉक्टर हर गोविन्द खुराना को केवल अमेरिकी वैज्ञानिकों को दी जाने वाली नेशनल अकेडमी ऑफ साइंस की सदस्यता भी दी गई थी.

. डॉक्टर हर गोविन्द खुराना को सिंथेटिक जीन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए भी जाना जाता है.

. डॉक्टर हर गोविन्द खुराना ने Chemical Biology: Selected papers of H. Govind Khurana के साथ अन्य कई पुस्तकें भी आई हैं.

. 9 नवंबर साल 2011 में अमेरिका में प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक प्रोफेसर हर गोविन्द खुराना की मृत्यु हो गई.

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



Most Popular

To Top