धर्म-ज्योतिष

“लोहड़ी’ मनाने के पीछे शिव ओर माता सती से जुड़ा हैं कारण, नयी दुल्हन के लिए बेहद खास हैं यह त्यौहार !

आज हम आपको लोहड़ी बनाने के पीछे जुडी कहानी के बारे में बताने वाले हैं, जानिए खबर आप भी ?

लोहड़ी का त्यौहार संक्रात से एक दिन पहले आता हैं जो लोगो में खुशिया, ऊर्जा ओर आपसी प्रेम को बढ़ाता हैं, ज्यादातर इस लोहड़ी त्यौहार को मनाने की परम्परा पंजाब में ज्यादा होती हैं।

लोहड़ी का त्यौहार बड़े हर्षो उल्लाश के साथ बनाया जाता हैं इस दिन बच्चे, बूढ़े ओर सभी आग जलाकर उसके चारो तरफ नाच गाना करते हुए चक्कर काटते हैं ओर इस आग में रेवड़ी, खील, मक्का की आहुति देते हैं ओर गजक ओर मेवा प्रसाद के रूप में खाया जाता हैं।

बच्चो ओर नवी नवेली दुल्हन के लिए इस त्यौहार का विशेष महत्व हैं, इस दिन इस नए जोड़े को स्पेशल तरीके से शादी की बधाई दी जाती हैं ओर सभी मिलकर नाचते हैं, सभी लोग भंगड़े पर जमकर ठुमके लगाते हैं।

इस त्यौहार को मनाया जाने के पीछे की कहानी सती माता से जुडी हैं कहा जाता हैं की दक्ष प्रजापति की बेटी सती के आग में दहन करने की याद में यह आग जलाई जाती हैं, इसके अलावा यह पोष की अंतिम रात होती हैं इसलिए बुजुर्ग लोग सूर्य देव से प्रार्थना करते हैं की मौसम को गर्माहट भरा बना दे।

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