राजनीति

कांग्रेस के कामयाब कदमों के कांटे?

राजंदाजी. गुजरात विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस संगठन में एक नई जान आई है… एक नया जोश आया है, लेकिन… अभी कांग्रेस की कामयाबी की राह से कांटे हटे नहीं हैं! यदि कांग्रेस अपने भीतर मौजूद इन कांटों को पहचान कर दूर नहीं करती है तो भाजपा के लिए वर्ष 2019 के चुनाव तक बाजी पलटना आसान होगा? कांग्रेस के लिए ये हैं विचारणीय मुद्दे- 1. गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेस धर्म निरपेक्षता की मूल भावना की ओर फिर से आई है… स्वधर्म स्वाभिमान, शेष धर्म सम्मान! यह महज चुनावी दिखावा नहीं होना चाहिए? 2. तुष्टीकरण के बजाय जो सही है, उसे स्वीकारना… किसी भी धर्म के धार्मिक नेताओं/राजनेताओं की सलाह के बजाय ऐसे निर्णय लेना जो उस धर्म/समाज के हित में हो और किसी धर्म/समाज को आहत नहीं करे. 3. बेलगाम बयानों पर सख्ती… गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेस के ही बड़े नेताओं के बेलगाम बयानों ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया… ऐसे बयानों पर सख्ती से रोक जरूरी है! कांग्रेस में ऐसे बेलगाम बयान देनेवाले नेताओं की पहचान करके उन्हें सख्त चेतावनी देना जरूरी है, था… भविष्य में भी ये नेता कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं! 4. आरक्षण पर नया नजरिया… आनेवाले चुनावों में आरक्षण प्रमुख मुद्दा रहेगा, खासकर नई जातियों को आरक्षण से लेकर आर्थिक आधार पर आरक्षण तक, ऐसी स्थिति में… आरक्षण को लेकर नया नजरिया अपनाना जरूरी है… जातिगत आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था आवश्यक है, लेकिन… इसमें भी एक सक्षम वर्ग तैयार हो गया है जो उस जाति विशेष के वास्तविक हकदारों को आगे नहीं आने दे रहा है जिससे आरक्षण की मूल भावना ही कमजोर हो रही है, इसलिए जातिगत आरक्षण जारी रखते हुए उसमें आर्थिक आधार और एक व्यक्ति को अधिकतम कितनी बार आरक्षण का लाभ दिया जाए? यह जोड़ा जाना एक अच्छा सुझाव है! 5. कांग्रेस का मुख्य मुकाबला भाजपा से है, इस वक्त भाजपा का प्रत्यक्ष संगठन तो मजबूत है ही, परोक्ष समर्थक संगठन भी सशक्त हैं जबकि कांग्रेस का वर्तमान संगठन उतना मजबूत नहीं है और समर्थक संगठन तो तकरीबन शून्य पर हैं, ऐसी स्थिति में… संगठन के पुनर्गठन की सख्त जरूरत है… पुराने अनुभवी और नए उर्जावान नेताओं को लेकर पुनर्गठन संभव है! 6. आत्मघाती गुटबाजी… कांग्रेस में पनपी प्रत्यक्ष/परोक्ष गुटबाजी ने बहुत नुकसान किया है और आगे भी नुकसान होने की आशंका है! उदाहरण के लिए… राजस्थान विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं क्योंकि राजस्थान की भाजपा सरकार जनता को कोई खास प्रभावित नहीं कर पाई है, लेकिन यहां पनप रही परोक्ष गुटबाजी कांग्रेस को भारी पड़ सकती है? इस वक्त यहां कांग्रेस के दो नेता सशक्त और प्रभावशाली हैं- पूर्व सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट, किन्तु… जहां सचिन पायलेट राजस्थान कांग्रेस का भविष्य हैं वहीं अशोक गहलोत वर्तमान, यदि… वर्तमान को छोड़कर भविष्य साधने की कोशिश करती है कांग्रेस तो कांग्रेस घाटे में रहेगी… यदि अशोक गहलोत को सीएम फेस बना कर कांग्रेस आगे बढ़ती है तो कांग्रेस फायदे में रहेगी! 7. जनहित के मुद्दों को जिंदा रखना कांग्रेस के लिए संजीवनी है, यदि… नोटबंदी से लेकर जीएसटी तक आमजन की परेशानी का अहसास, कांग्रेस जिंदा रख पाए तो उसका लाभ चुनावों में मिलेगा! 8. महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों की सही तस्वीर जनता के बीच कांग्रेस प्रस्तुत कर पाए तो भी कांग्रेस फायदे में रहेगी! 9. भावनात्मक लहर भाजपा की प्रमुख ताकत है, यदि… कांग्रेस, भाजपा के निर्विवादित बड़े नेताओं पर स्तरहीन राजनैतिक हमले करती है तो उसे गुजरात चुनाव जैसा नुकसान उठाना पड़ सकता है! 10. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी नेगेटिव इमेज से बाहर आ गए हैं, लेकिन… उनकी पाॅजेटिव इमेज अभी मजबूत बनना बाकी है, यह उनके बयानों और राजनीतिक निर्णयों/गतिविधियों पर निर्भर है! राजनीतिक सारांश… दल निरपेक्ष मतदाताओं का रूझान कांग्रेस की ओर बढ़ रहा है, लेकिन… इस रूझान को बनाए रखने के लिए कांग्रेस को कई मोर्चों पर एकसाथ सदिश प्रयास करने होंगे!

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