राजनीति

कोई नही है झुकने को तैयार, क्या ‘आप’ में हो जाएगा दो फाड़

अरविंद केजरीवाल अपने ज़िद्दी रवैय्ये के लिए जाने जाते हैं। इस वजह से उनके खिलाफ पार्टी के ही कुछ लोग हो जाते हैं। पार्टी में वो अपने से उपर शायद किसी को देखना भी नही चाहते हैं। 2012 में हुए भ्रष्टाचार आंदोलन के बाद बनी आम आदमी पार्टी के पास उस वक्त कई सारे बड़े नेम थे। लेकिन धीरे धीरे पार्टी बस एक ही चेहरे के तरफ देखने लगी। दिल्ली चुनावों में जीत के बाद पार्टी से दो बड़े नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी विरोधी कामों के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया। योगेंद्र और प्रशांत पार्टी के गिने चुने बड़े चेहरों में से एक थे।

अब पार्टी से शायद कवि और राजस्थान के आम आदमी पार्टी के संयोजक कुमार विशवास को पार्टी विरोधी कामों के वजह से पार्टी से बाहर कर दिया जाए या फिर कुमार खुद ही पार्टी से इस्तीफा दे दें। राज्यसभा में आप के तरफ से जाने के लिए कुमार विश्वास बहुत दिनों से चाह रहे थे। उन्होंने इसके लिए पार्टी में अपनी बात भी रखी थी। पर, अरविंद केजरीवाल और पार्टी के कुछ नेता शुरु से ही इसके लिए राज़ी नही हो पा रहे थे।

कुमार विश्वास पार्टी में हो रही गतिविधियों पर खुल कर बोलते रहे हैं। सोशल मीडिया के ज़रिये उन्होंने कई बार पार्टी पर ताने भी मारे।

वहीं दूसरी तरफ केजरीवाल और कुछ नेताओं का मानना है कि कुमार ज़बरदस्ती ही पार्टी पर आरोप लगाते रहे हैं। पार्टी के बड़े नेता गोपाल राय ने कुमार विश्वास पर सीधे प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम चुनाव के बाद केजरीवाल की सरकार को गिराने का षड्यंत्र रचने के केंद्र में कुमार विश्वास थे।

सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में पार्टी के अंदर बड़ा बवाल हो सकता है। पार्टी के विघटन की आशंका भी जताई जा रही है। आप के दिल्ली संयोजक गोपाल राय ने दावा किया कि पिछले वर्ष अप्रैल में नगर निगम चुनावों के बाद दिल्ली सरकार को गिराने का प्रयास किया गया। उस षड्यंत्र के केंद्र में कुमार विश्वास थे।

उन्होंने फेसबुक लाइव में कहा कि इस संबंध में कुछ विधायकों के साथ अधिकतर बैठकें उनके आवास में हुई। कपिल मिश्रा बैठक का हिस्सा थे और बाद में उन्हें कैबिनेट से हटा दिया गया। गोपाल राय ने एक वीडियो का हवाला दिया, जिसे विश्वास ने जारी किया था। इसमें भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने केजरीवाल सरकार पर परोक्ष प्रहार किया था।

राय ने कहा कि वीडियो के माध्यम से विश्वास ने निगम चुनावों में आप की संभावनाओं को खराब करने का प्रयास किया था। स्थानीय चुनाव में पार्टी भाजपा से हार गई थी। इससे पहले विश्वास ने ट्वीट किया था कि वीडियो में उन्होंने जो मुद्दे उठाए , उन पर वह पुनर्विचार नहीं करेंगे।

गोपाल राय के बयान पर जवाब देते हुए कुमार विश्वास ने बाहुबली का ज़िक्र किया।

पलटवार करते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि मेरे ‘शव’ के साथ छेड़छाड़ ना करें। उन्होंने अरविंद केजरीवाल और गोपाल राय पर इशारों-इशारों में निशाना साधते हुए कहा मुझे पता है इस माहिष्मति की शिवगामी कोई और है। हर बार नए कटप्पा को पेश किया जाता है। बीजेपी और कांग्रेस से आए हुए नए-नए गुप्ता के ‘धन योग’ का गोपाल राय जी आनंद लें, मेरे शव के साथ छेड़छाड़ ना करें।

क्या हो सकता है आगे ‘आप’ के अंदर

गोपाल राय का ये बयान आप का आधाकारिक बयान माना जा रहा है। अगर इसको ही आधार माना जाए तो देखा जा सकता है कि पार्टी से एक और बड़ा चेहरा बाहर होने की स्थिति में है। क्योंकि आम आदमी पार्टी के तरफ से अब दो तरह के बयान आ रहे हैं, एक केजरीवाल के लिए और दूसरा कुमार विश्वास के लिए। देखा जाए तो कुमार विश्वास का पार्टी को बहुत योगदान शुरु से रहा है, तो इस तरह से पार्टी के कई सारे कार्यकर्ता कुमार के तरफ जा सकते हैं।

इसके अलावा योगेंद्र और प्रशांत पहले से ही पार्टी से बाहर हैं। हो सकता है कि कुमार अब इन लोगों का दामन थाम लें। जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, उसको देखते हुए तो यही लग रहा है कि अब कोई भी झुकने को तैयार नही है।

पार्टी के अंदर ऐसी स्थिति बन रही है कि पार्टी के दो फाड़ कभी भी हो सकते हैं। कार्यकर्ता एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं।

हो सकता है कि दिल्ली की सरकार पर भी इसका असर पड़ने लगे। ये बात समझ से परे है कि पुराने नेता की जगह राज्यसभा ऐसे दो लोगों को क्यों भेजा जा रहा है जो कि पार्टी में नए नए आए हैं। अगर पार्टी में कुमार विश्वास इस लायक नही थे तो पार्टी के ही दूसरे नेताओं को राज्यसभा क्यों नहीं भेजा गया।

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