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बैंकों में भी डूब सकता है आपका पैसा, जानिये क्या है FRDI

आज कल एक नये बिल की चर्चा हो रही है, जिसका नाम है FRDI. लेकिन ज्यादातर लोगों को अभी भी इसके बारे में पता नहीं है. दरअसल इस नये बैंक डिपॉजिट बिल के एक प्रावधान के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको को यह अधिकार दिया जा सकता है कि दीवालिया होने की स्थिती में बैंक ये तय करेगा कि जमाकर्ता को कितने पैसे वापस करना है. यानि की अगर बैंक डूबता है तो जमाकर्ता के सारे पैसे भी डूब सकते हैं.
इस ख़बर के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली की सफाई आई है कि इस बिल से कम रकम जमा करने वाले उपभोक्ताओं को कोई नुकसान नहीं होगा. जेटली ने कहा कि सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि वो जमाकर्ताओं के धन की रक्षा करेगी.
आंकड़ों के मुताबिक करीब 63 प्रतिशत भारतीयों ने अपना पैसा राष्ट्रीय बैंकों में जमा कर रखा है. जबकि 18 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने प्राइवेट बैंकों में जमा किया है.
जब हम बैंक में पैसा जमा करते हैं तो उसके बदले में हमें बैंक से किसी भी प्रकार की गारंटी नहीं मिलती है. इस तरीके से हम एक असुरक्षित जमाकर्ता हैं. भारत के मुकाबले दुनिया के अन्य देशों में लोग बैंक में कम पैसा रखते हैं.
ये बिल अभी संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा. यह बिल तैयार कर के अगस्त महीने में ही संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया है.
सरकारी बैंकों का NPA यानि कि बैड लोन इस समय बढ़ कर छह लाख करोड़ से ज्यादा का हो गया है. भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का एनपीए इस साल के जून महीने में एक लाख 88 हजार करोड़ का हो चुका है.
ये आंकड़े बैंकों की बदहाली की स्थिती को दर्शाते हैं. ऐसी स्थिती में अगर बैंक डूबते हैं तो वे खुद को दीवालियापन से उबारने के लिए आम जनता के पैसों का इस्तेमाल करेंगे और नए बिल के मुताबिक उन्हें ये अधिकार मिल सकता है कि वे जमाकर्ता को कितना पैसा वापस करेंगे.
मौजूदा नियम के मुताबिक अगर बैंक में आपके 10 लाख रुपये तक की राशि जमा है और अगर बैंक डूबे तो केवल 1 लाख रुपये तक की राशि वापस मिलेगी. और हां आप किसी कोर्ट कोचहरी में केस भी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि सरकार ने बैंक को ये अधिकार पहले ही दे रखा है.
हालांकि, मौजूदा नियम में यह प्रावधान है कि दीवालिया होने की स्थिती में बैंक को एक निश्चित राशि जमाकर्ता को वापस करनी होगी.
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