रोचक खबरें

शाप से मुक्त हुआ मैसूर राजघराना- कई दशकों बाद गूंजी किलकारी, त्रिशिका ने दिए बेटे को जन्म

। मैसूर राजघराने में 40 साल बाद किसी बच्चे ने किलकारी गूंजी है। कई दशकों बाद इस राज परिवार में एक लड़के का जन्म हुआ है। बुधवार रात करीब 9.30 बजे त्रिशिका ने निजी हॉस्पीटल में पुत्र को जन्म दिया। चिकित्सकों के मुतबिक जच्चा-बच्चा की सेहत अच्छी है। वहीं इस खुशखबरी से राज परिवार में फिर से रौनक देखने को मिली है।

इस राज परिवार में कई दशकों से किसी पुत्र का जन्‍म नहीं हुआ था। लेकिन शाही परिवार के उत्तराधिकारी युदवीर श्रीकंठ दत्ता चामराजा वाडियार के पिता बनने के साथ ही परिवार में खुश है।

बता दें कि राजस्थान के डूंगरपुर राजघराने की त्रिशिका और यदुवीर 2016 में परिणय सूत्र में बंधे थे। मैसूर के वाडियार राजघराने के राजा यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार और राजस्थान के डूंगरपुर की राजकुमारी त्रिशिका विवाह बंधन में बंध गए। मैसूर के ऐतिहासिक अंबा विला पैलेस में यह शाही शादी हुई।

यदुवीर बोस्टन से पढ़े हैं और अभी केवल 26 साल के हैं। युदवीर को पूर्व शाही परिवार के चामराजा वाडियार के निधन के बाद उनकी पत्नी प्रमोदा देवी ने गोद लिया था। इससे पहले महल में श्रीकंठ दता के 1953 में जन्म के वक्त किलकारी गूंजी थी। श्रीकंठ दत्ता की दूसरी पत्नी के संतान थे।

इस परिवार को मिला था शाप

मैसूर के महाराज के वंश को एक शाप मिला हुआ है जिसके चलते उनके वंश में 400 साल से कोई संतान पैदा नहीं हुई। स्वयं महाराज के पिता दिवंगत महाराज श्रीकांतदत्त नरसिम्हराज वाडियार और रानी प्रमोदा देवी की अपनी कोई संतान नहीं थी। इसलिए रानी प्रमोदा देवी ने अपने पति की बड़ी बहन के बेटे यदुवीर को गोद लिया और वाडियार राजघराने का वारिस बना दिया।मैसूर राजघराने के इस शाप की कहानी 1612 में दक्षिणी भारत के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य विजयनगर के पतन से जुड़ी हुई है। साम्राज्य के पतन के बाद वाडियार राजा के आदेश पर विजयनगर की अकूत धन संपत्ति लूटी गई थी। उस समय विजयनगर की तत्कालीन महारानी अलमेलम्मा हार के बाद एकांतवास में थीं। वाडियार ने महारानी के खजाने पर कब्जा करने के लिए शाही फौज भेजी।

शाही फौज के आने से दुखी महारानी अलमेलम्मा ने वाडियार राजा को शाप दिया कि जिस तरह तुम लोगों ने मेरा घर ऊजाड़ा है उसी तरह तुम्हारा देश वीरान हो जाए। इस वंश के राजा-रानी की गोद हमेशा सूनी रहे। इसके बाद अलमेलम्मा ने कावेरी नदी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली।राजा को शाप का पता चलने पर वह काफी दुखी हुए परन्तु तब कुछ भी नहीं हो सकता था। तब से आज तक लगभग 400 सालों से वाडियार राजवंश में किसी भी राजा को संतान के तौर पर पुत्र नहीं हुआ। इस वंश के सभी राजा अपने किसी रिश्तेदार के बच्चे को गोद लेते हैं और उसे ही अपना उत्तराधिकारी बनाते हैं। यानी राज परंपरा आगे बढ़ाने के लिए राजा-रानी 400 सालों से परिवार के किसी दूसरे सदस्य के पुत्र को गोद लेते आए हैं।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



Most Popular

To Top