जयपुर

जयपुर में सात दिन लगेगा पक्षियों को पहचानने का मेला

जयपुर। जयपुर में एक सप्ताह की ‘पक्षी पहचानो’ प्रदर्शनी का आयोजन होगा। प्रदर्शनी का उद्घाटन सोमवार सुबह 10 बजे सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन ग्राउंड पर होगा। प्रदर्शनी का आयोजन पक्षी प्रेमी समिति और भवानी निकेतन शिक्षा समिति कर रही हैं।

प्रदर्शनी का उद्घाटन मशहूर कवि, गायक और म्यूजिक डायरेक्टर इकराम राजस्थानी करेंगे। इस मौके पर प्रसिद्ध पक्षी जीवन फोटोग्राफर किशन सहित पक्षियों की दुनिया के कई जानकार लोग आमंत्रित किए गए हैं। प्रदर्शनी के माद्यम से जयपुर के नागरिकों को पक्षियों की रहस्यमयी दुनिया की नायाब झलक कैमरे की आंखों से देखने का अवसर मिलेगा। आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ. महावीर सिंह नाथावत ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को स्थानीय पक्षियों की पहचान कराने और पक्षियों के प्रति चेतना जागृत करना है। उजड़ते वनों, तालाबों , खेत-खलिहानों और गावों के शहरीकरण से पक्षियों की दुनिया सिकुड़ती जा रही है। परिणाम स्वरूप राजस्थान के आम जीवन के साथ आस्था , शगुन अपशगुन से जुड़ी पक्षियों की यह दुनिया हमसे दूर जा रही है।

18000 प्रजातियां हैं पक्षियों की
विश्व भर में पहचानी जा चुकी पक्षियों की 18000 प्रजातियां हैं जिनमें से 150 प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। 1300 प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। आकाश में स्वच्छंद विचरण करने वाली चिड़ियाओं के मामले में एशिया और उसमें भी राजस्थान का बड़ा महत्व है। राजस्थान करीब 500 पक्षी प्रजातियों का घर है। इनमें से 100 प्रजाति के पक्षी दूसरे देशों से आते हैं। घोंसला बनाते हैं। और बच्चों को लेकर अपने देश लौट जाते हैं। राजस्थान की 19 पक्षी प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। भारत में 2016 तक पहचानी जा चुकी 1266 पक्षियों की प्रजातियां हैं। इनमें से 14 प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं और सैकड़ों विलुप्त होने की कगार पर हैं। दुख की बात यह है कि बाकी बची प्रजातियों के संरक्षण के लिए सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, न भारत सरकार और न ही राज्य सरकार।

प्रदर्शनी में राजस्थान और देश के विभिन्न हिस्सों से कैमरे से खींचे गए चित्रों को सजाया जा रहा है, ताकि लोग खास कर नई पीढ़ी पक्षियों की नायाब दुनिया की झलक ले सकें और उसको बचाने के उद्देश्य से आगे आ सकें। डॉक्टर नाथावत के मुताबिक प्रदर्शनी के अंतिम दिन 6 नवम्बर को ‘पक्षी प्रेमी’ अलंकरण की घोषणा होगी। यह अलंकरण उस व्यक्ति को दिया जाएगा, जिसका पक्षियों की दुनिया की भलाई मैं महत्वपूर्ण योगदान होगा। उसी दिन एक प्रतियोगिता भी होगी, जिसमें पक्षियों की पहचान पर प्रश्नोत्तरी होगी। सर्वाधिक सही जवाब देने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा।

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