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आरुषि हत्याकांड से जुड़ी ये खास बातें जानते है आप

You know these things related to Aarushi massacre

आरुषि-हेमराज हत्याकांड ने 2008 में पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। नोएडा के जल वायु विहार में 14 साल की आरुषि तलवार की उसके बेडरूम में लाश पाई गई थी। उसका गला रेत कर हत्या की गई। बेटी का शव देखकर माता-पिता (राजेश और नुपूर तलवार) का रो-रोकर बुरा हाल था। शक की सुई सबसे पहले घर के नौकर हेमराज पर घूमी लेकिन आरुषि की हत्या की हत्या के एक दिन बाद नौकर हेमराज की लाश तलवार फैमिली के घर की छत पर मिली। इस मामले में कई बार सस्पेंस आय़ा और आखिरकार 29 मई 2008 को उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी।

जानिए इन 9 सालों में क्या-क्या हुआ
16 मई, 2008: आरुषि की लाश नोएडा में अपने घर में बिस्तर पर मिली। उसकी गला काट कर हत्या की गई थी।

17 मई: हेमराज की लाश जल वायु विहार में तलवार दंपति की घर की छत पर मिली।

22 मई: पुलिस ने पहली बार माना कि मामला ऑनर किलिंग का हो सकता है। इस आधार पर डॉ. राजेश तलवार और उनकी पत्नी डॉ. नूपुर तलवार से पूछताछ की गई। आरुषी की हत्या की सुई पूरी तरह से तलवार फैमिली पर लटक गई। हालांकि यह भी जांच की गई कि घर का कोई तीसरा सदस्य इस हत्या को अंजाम न देकर गया हो।

23 मई: नौकर हेमराज और आरुषि की हत्या के लिए आखिरकार राजेश तलवार का नाम बार-बार सामने आया। पुलिस डबल मर्डर केस में राजेश को अरेस्ट कर लिया।
31 मई: डबल मर्डर केस की जांच सीबीआई के हवाले की गई।

10 जून: हिरासत में लिए गए डॉ. तलवार के कंपाउंडर कृष्णा का लाई डिटेक्टर टेस्ट किया गया। उसे बेंगलुरु में नार्को टेस्ट के लिए ले जाया गया।

13 जून: नार्को टेस्ट के बाद सीबीआई ने कृष्णा को गिरफ्तार किया। उस पर हत्या का आरोप लगाया गया।

11 जुलाई: सीबीआई ने कहा कि डॉ. राजेश बेगुनाह हैं और असली कातिल कंपाउंडर कृष्णा है।

12 जुलाई: राजेश तलवार को गाजियाबाद की डासना जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया।

12 सितंबर: सीबीआई 90 दिनों तक चार्जशीट फाइल नहीं कर सकी व कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल को सीबीआई कोर्ट से जमानत मिल गई।

साल 2009 में आरुषि हत्याकांड की जांच के लिए पहली टीम को हटाकर सीबीआई की दूसरी टीम बनाई गई। 15 फरवरी से 20 के बीच डॉ. तलवार का नार्को-एनालिसिस टेस्ट किया गया और 29 दिसंबर को सीबीआई ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दायर की। इसमें नौकर को क्लीनचिट दे दी जबकि तलवार दंपति को इसमें मुख्य आरोपी करार दिया गया।

25 जनवरी 2011: गाजियाबाद की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में राजेश तलवार पर उत्सव शर्मा ने हमला किया, इसमें डॉ. तलवार के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं।

9 फरवरी: गाजियाबाद की विशेष अदालत ने तलवार दंपति पर सबूत मिटाने और आरुषि हत्याकांड में शामिल होने का आरोप तय किया।

21 फरवरी: तलवार दंपत्ति ने अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।

18 मार्च: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपत्ति की अर्जी खारिज कर दी। 19 मार्च को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल दी।

साल 2012: डबल मर्डर के चार साल बाद आरुषि की मां नूपुर तलवार ने कोर्ट में सरेंडर किया।

26 नवंबर 2013: न्यायालय का फैसला आया तो सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस लाल ने अपने 208 पन्नों के फैसले में राजेश और नूपुर तलवार को दोषी करार दिया।

21 जनवरी 2014: तलवार दंपत्ति ने लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की। जिस पर आज अक्तूबर 2017 को कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए तलवार दंपति को रिहा कर दिया। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में बरी किया।

दो फिल्म भी बन चुकी हैं इस हत्याकांड पर 
इस हत्याकांड में कई मोड़ आए, इसे ऑनर किलिंग के साथ जोड़कर भी देखा गया। मिस्ट्री केस होने की वजह से यह काफी समय तक मीडिया में चर्चा बना रहा है। इस हत्याकांड पर दो फिल्में भी बन चुकी हैं लेकिन पूरी सच्चाई उनके जरिए भी सामने नहीं आई। निर्देशक मनीष गुप्ता ने बनाई रहस्य, यह कहानी उस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने की कोशिश थी जिसने पेरेंट्स और बच्चे के रिश्ते को कटघरे में खड़ा कर दिया था। दूसरी फिल्म निर्देशक मेघना गुलजार ने बनाई तलवार। हालांकि यह भी इस मर्डर मिस्ट्री से पर्दा नहीं उठा पाई।

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