बीकानेर

जोशी जाति के लोगों के 5 मार्च से सात दिन तक नहीं लगेगा ‘छमका-तड़का’ / होली का दहन के दिन 12 मार्च को नहीं जलेगा चूल्हा

बीकानेर (राजीव जोशी /छोटीकाशी डॉट कॉम ब्यूरो)। पुरानी परम्परा के अनुसार गंगदासाणी/चोवटिया जोशी परिवार के लोगों के घरों में रविवार को होलाष्टक लगने के साथ ही घर में साग-सब्जी या अन्य खाद्य सामग्री में लगने वाला छमका सात दिनों तक बंद रहेगा और होलिका दहन [रविवार, 12 मार्च,2017] को चूल्हा नहीं जलेगा। कहा जाता है कि ब्राह्मण सिन्ध से चलकर भारत में जैसलमेर के रास्ते से आए थे। आज भी पुष्करणा ब्राह्मण जैसलमेर, फलोदी, बीकानेर और जोधपुर में अधिक रहते हैं। बीकानेर के साले की होली निवासी बंशी जोशी बताते हैं कि कहा जाता है कि जैसलमेर के मढ़ गांव में भी पुष्करणा बहुल्य था वहां पर गंगदासाणी/चोवटिया जोशी परिवार रहता था। होली पर्व मनाते समय होली की परिक्रमा लगाते वक्त गंगदासाणी/चोवटिया जोशी परिवार का एक बच्चा होली की चपेट में आ गया उसे बचाने के चक्कर में उसका परिवार भी होली की लपटे से घिर गया और भस्म हो गया। परम्परा के अनुसार उसी दिन से होलाष्टक लगने पर गंगदासाणी/चोवटिया जोशी परिवार के घरों में छमका या तड़का नहीं लगाते हैं व होली दहन के दिन घर का चूल्हा भी नहीं जलाया जाता है।

….यदि हो लड़का, जीवित रहे एक साल और….!
बीकानेर (छोटीकाशी डॉट कॉम ब्यूरो)। होलिका दहन के दिन लड़के का जन्म हो और वह लड़का पूरे एक साल तक जिंदा रहे और अपनी माँ के साथ जलती हुई होलिका की परिक्रमा कर होलिका की पूजा करे और वह परिवार सम्पूर्ण गंगदासाणी/चोवटिया जोशी जाति के लोगों को प्रसाद खिलाए तो उसी दिन से गंगदासाणी/चोवटिया जोशी के लोग होलिका में छमका लगा सकते हैं।

इस तरह भोजन का प्रबन्ध…
बीकानेर (छोटीकाशी डॉट कॉम ब्यूरो)। जोशी जाति के घरों में लगभग इन सात दिनों तक खाना नहीं बनता है। इस दौरान वे ऐसी सब्जी नहीं बनाते जिसमें छौंक लगाई जाए या कोई भी ऐसा व्यंजन नहीं बनाते जो तला जाए। फ लस्वरूप इन गंगदासाणी/चोवटिया जोशी जाति के रिश्तेदार व लड़के के ससुराल के संबंधी इन लोगों के लिए सात दिनों तक भोजन का प्रबंध करते हैं।

‘सगे-सम्बन्धी’ करते हैं होली की मस्ती में शामिल
बीकानेर (छोटीकाशी डॉट कॉम ब्यूरो)। जोशी परिवार के लोगों को रंग लगाने के लिए व होली खेलने के लिए अपने घरों से बाहर निकालने के लिए इनके मित्र, रिश्तेदार, सगे संबंधी इनके घर जाते हैं और इनके चेहरों पर रंग लगाकर होली की मस्ती में इनको शामिल करते हैं।

रिपोर्ट : राजीव जोशी 

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