बीकानेर

गोठ में महकता है बीकानेर का ‘स्वाद’ / ओझा सत्संग भवन में होली स्नेह मिलन कार्यक्रम आयोजित

Prem Narayan Joshi & Others Programme Goth in Ojha Satsang Bhavan (Bikaner)

Prem Narayan Joshi & Others Programme Goth in Ojha Satsang Bhavan (Bikaner)

Goth in Ojha Satsang Bhavan (Bikaner)

Goth in Ojha Satsang Bhavan (Bikaner)

Goth in Ojha Satsang Bhavan (Bikaner)

Goth in Ojha Satsang Bhavan (Bikaner)

विनय पत्रिका ब्यूरो, बीकानेर। मिष्ठान में रसगुल्ले और नमकीन में भुजिया के लिए जगप्रसिद्ध व रेगिस्तानी धोरों के समीप बसे चौक-पाटों के शहर बीकानेर को धर्मनगरी, सांस्कृतिकनगरी, मरुनगरी और छोटीकाशी के रुप में जाना जाता है।

Report Updated By Journalist Rajeev Joshi

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यहां की सांस्कृतिक समृद्ध परम्पराओं का कोई सानी नहीं है। कई प्रकार की चीजों को समेटे यह शहर अपने आप में अनूठा है। ये सब चीजें बीकानेरी हवा-पानी में रची बसी सामूहिकता की सिंचाई से नई पीढ़ी में उत्तरोत्तर आती रहती हैं और सामूहिकता का एक प्रमुख माध्यम गोठ भी है। गोठ में जब सभी समुदाय के लोग मिल-जुलकर अपने-अपने व्यंजनों और पकवानों से गीतों और लोककलाओं की चर्चा से माहौल को सांस्कृतिक रंगों में समाते हैं। तब निखरकर आता है बीकानेर का वास्तविक स्वरुप। गोठ मात्र एक साथ मिलकर खाने-पीने का बहाना ही नहीं रह जाति बल्कि एक समग्र समाज और समृद्ध शहर की संरचना में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। गोठें प्राय: तालाब किनारे, बगीचीयों में, धोरों पर, मंदिर परिसरों में अथवा बड़े मकान या हवेलियों में मनायी जाती है। युवा पीढ़ी इसे ‘पिकनिक’ के रुप में देखती और समझती है लेकिन पिकनिक जहां क्षणिक सुख अनुभूति देती है वहीं गोठ से जीवन न केवल महक उठता है बल्कि इन्द्रधनुषी रंगों से खिल उठता है। रंगों की बात करें तो त्यौंहार होली पर भी गोठ की परम्परा ठीक वैसे ही रही है जैसे कि सावन-भादौ में या अन्य वार-त्यौंहार पर। इसी संदर्भ में गत दिनों होलाष्टक से पूर्व जय गणेश मित्र मण्डली द्वारा कि ए गए कार्यक्रम व नत्थूसर गेट पर तणी तोडऩे के कार्यक्रम पश्चात् एक गोठ का आयोजन ओझा-सत्संग भवन में किया गया। जहां पुष्करणा समाज की विभिन्न जातियों के लोगों ने इसमें न केवल भाग लिया बल्कि ‘प्रसाद’ भी ग्रहण किया।

(Bikaner)”]Shri Lal Vyas [Shribha] (Bikaner)

बीकानेर की सांस्कृतिक धरोहर और परम्पराओं का विश्व में अनूठा स्थान है। यही नहीं बीकानेर का साम्प्रदायिक सौहार्द्र भी एक मिसाल है। सामूहिक गोठ करना अपने आप में एक अनूठा कार्य है। -श्रीलाल व्यास ‘श्रीभा’

Surendra Kumar Vyas (Bikaner)

Surendra Kumar Vyas (Bikaner)

सामूहिक गोठ से सामाजिक समरसता का संदेश जाता है। शहर के लोगों द्वारा संगठित होकर गोठ करना तो दूर साथ ही आपस में एक साथ बैठकर चर्चा-विचार करना भी एक नई भूमिका तय करता है। -सुरेन्द्र व्यास

Kepsa Pushkarna (Bikaner)

Kepsa Pushkarna (Bikaner)

प्रसाद [गोठ] एक तरह से अपने आप में आपसी सद्भाव का संदेश भी देता है। गोठ चाहे कैसी भी हो आपस में मिल-बैठकर मानवीयता और श्रेष्ठता को बरकरार रखने को भी लोग बखूबी समझते हैं। -कैपसा पुष्करणा

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