बीकानेर

एक-दूसरे पर हर्ष-व्यास जाति के लोग करेंगे पानी से भरा ‘वार’

बिस्सा चौक में रम्मत के दौरान आधी रात को आशापुरा माता के स्वरुप प्रकट होने के मौके का दृश्य। {Bikaner}

बिस्सा चौक में रम्मत के दौरान आधी रात को आशापुरा माता के स्वरुप प्रकट होने के मौके का दृश्य। {Bikaner}

भट्टड़ों के चौक में चल रही रम्मत में ख्याल रखते शहरवासी। {Bikaner}

भट्टड़ों के चौक में चल रही रम्मत में ख्याल रखते शहरवासी। {Bikaner}

बीकानेर। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में होली एक प्रमुख त्यौहार है। बसंत ऋतु के आगमन पर बसंत का स्वागत करने के लिए रंगों का त्यौहार होली पूरे देश में उल्लास व उमंग के साथ मनाया जाता है राजस्थान के बीकानेर में होली को अनूठे तरीके से भी मनाया जाता है।

Report Updated By Journalist Rajeev Joshi

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ख्यातनाम पुष्करणा समाज की हर्ष व व्यास जाति के बीच हर्षों का चौक में खेला जाने वाला ‘डोलची मार’ खेल अपने आप में अनूठा है। बीकानेर में होली से आठ दिन पहले होलाकष्टक के साथ ही होली के आयोजनों की शुरूआत हो जाती है लेकिन होली के मौके पर इन दो जातियों के लोगों को ‘डोलचीमार’ खेल का इंतजार रहता है। इस दौरान लोग खूब आनन्द के साथ मस्ती उठाते हैं। दोनों जाति के लोग एक-दूसरे की पीठ पर पानी से प्यार भरा ‘वार’ करते हैं। पानी के इस ‘वार’ को देखने के लिए सैकड़ों लोग इसके साक्षी बनते हैं। दोपहर में शुरु होने वाला यह खेल लगभग तीन से चार घण्टे तक चलता है। हर्ष जाति के लोग गुलाल उछालकर खेल के समापन की घोषणा करते हैं। समापन के साथ ही गेवर गली के आगे खड़े होकर ये लोग होली के गीत गाते हैं और अपनी-अपनी विजय की घोषणा कर प्रेमपूर्वक होली मनाते हैं। इस दौरान एक-दूसरे पर व्यंग्य बाणों के साथ-साथ पानी के ‘वार’ चलते रहते हैं। हर्ष जाति की ओर से जहां शहर के जाने-माने समाजसेवी शंकरलाल हर्ष, आकाशवाणी से सेवानिवृत्त वरिष्ठ उद्घोषक चंचल हर्ष सहित अनेक यहां पहुंचते हैं तो व्यास जाति की ओर से ख्यातनाम ज्योतिषाचार्य हरिनारायण व्यास ‘मन्नासा’ समेत कई पहुंचते हैं।

Om Prakash Harsh (Bikaner)

Om Prakash Harsh (Bikaner)

कलेण्डर वर्ष के दौरान बसंत पर्व में होली एक ऐसा त्यौंहार है जहां वार-त्यौंहार व समय-समय पर तय कार्यक्रमों के अनुसार परम्परा का निर्वहन किया जाता है। अलमस्त बीकानेर शहरवासियों द्वारा होली पर्व के मौके होने वाले कार्यक्रमों को ‘हर्ष’ और उल्लास के साथ मनाया जाता है। -ओमप्रकाश हर्ष

Vijay Laxmi Harsh (Rani) Bikaner

Vijay Laxmi Harsh (Rani) Bikaner

परम्पराओं के शहर बीकानेर में लोग होली को पारम्परिक अंदाज में मनाते हैं। इन्हीं परम्पराओं के अनुसरण में बीकानेर के पुष्करणा ब्राह्मण समाज के हर्ष व व्यास जाति के लोगों के बीच डोलचीमार होली का आयोजन किया जाता है, जिसे देखने के लिए लोग उमड़ पड़ते हैं। -विजयलक्ष्मी हर्ष ‘रानी’

Annpurna Vyas (Bikaner)

Annpurna Vyas (Bikaner)

परम्पराओं के निर्वहन में आज भी बीकानेर के लोग पीछे नहीं है और यह आयोजन सैकड़ों सालों बाद भी पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। बाद में शाम के समय इसी दिन हर्ष जाति के लोग हर्षोल्लाव तलाब स्थित अमरेश्वर महादेव की पूजा करते हैं और गेवर के रूप में गीत गाते हुए अपने घरों की ओर आते हैं। -अन्नपूर्णा व्यास

Rajendra Vyas-Raja (Bikaner)

Rajendra Vyas-Raja (Bikaner)

पानी डालने के लिए बड़े बड़े कड़ाव यहॉं रखे जाते हैं। खेल के प्रारम्भ होने से पहले इस स्थल पर अखाड़े की पूजा होती है और खेल में हिस्सा लेने वाले लोगों के तिलक लगाया जाता है। यहॉं यह बता देना जरूरी है कि व्यास जाति के लोगो द्वारा खेल से एक दिन पहले गेवर का आयोजन किया जाता है। राजेन्द्र व्यास ‘राजा’

Rajendra Harsh (Bikaner)

Rajendra Harsh (Bikaner)

इस खेल में चमड़े की बनी डोलची होती है जिसमें पानी भरा जाता है और यह पानी हर्ष व व्यास जाति के लोग एक दूसरे की पीठ पर पूरी ताकत के साथ फेंकते हैं। पानी का वार इतना तेज होता है कि पीठ पर निशान बन जाते हैं। इस खेल को हर्षों के चौक में हर्षों की ढ़लान पर खेला जाता है। -राजेन्द्र हर्ष

Seema Harsh (Bikaner)

Seema Harsh (Bikaner)

होली से चार दिन पहले हर्ष व व्यास जाति के बीच खेला जाने वाला डोलची मार खेल जगप्रसिद्ध है। शहर के काफी जगहों से लोग यहां पहुंचकर ‘मस्ती’ का आनन्द उठाते हुए आश्चर्यचकित हो जाते हैं। लोग एक-दूसरे की पीठ पर डोलची मारकर, रंग लगाना लोगों को अलग नजारा दिखाता है। -सीमा हर्ष

Sudheer Vyas (Bikaner)

Sudheer Vyas (Bikaner)

वाकई ऐसा है मेरा बीकाणा शहर, होली के मौके कहीं गेर की टेर मिल रही है। रात-रातभर रम्मतों की रंगत जम रही है वहीं शहरभर में घूम रहे स्वांगों की हरकतें खिलखिलाने को मजबूर कर रही है और इस दौरान पुष्करणा समाज के हर्ष व व्यास जाति के बीच खेल अच्छा वातावरण पैदा करता है। -सुधीर व्यास

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