बीकानेर

बीकानेर में जम रहा 11:56 का ‘रंग’ / विजयापे्रमियों पर चढ़ा है ‘मस्ती’ का रंग भी

सांसोलाव तालाब के समीप मास्टर मदन जैरी के नेतृत्व में भांगपे्रमी 'विजया' का रसास्वादन लेने के बाद चर्चा करते। {Photo : ChhotiKashi.Com/Ramratan}

सांसोलाव तालाब के समीप मास्टर मदन जैरी के नेतृत्व में भांगपे्रमी 'विजया' का रसास्वादन लेने के बाद चर्चा करते। {Photo : ChhotiKashi.Com/Ramratan}

विनय पत्रिका ब्यूरो, बीकानेर। बीकानेर की होली अपने अनूठे रंगों के कारण अलग ही रंग जमाती रही है। काफी वर्षों से यहां रंग जमाने की अलग-अलग गतिविधियां परम्परा का रुप भी ले चुकी हैं। उन्हें में एक है भरी दुपहर में 11.56 का ‘रंग’।

Report Updated By Journalist Rajeev Joshi

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छोटीकाशी डॉट कॉम न्यूज नेटवर्क के अनुसार ये रंग इतना गहरा और पे्रम से पका होता है कि शिवभक्तों के अलावा बाकी लोग भी इसके ‘रंग’ में रंगे दिखते हैं। भले ही शिव के श्रद्धालूओं के अलावा बाकी लोगों ने हरी-तरी का ‘आचमन’ भी न लिया हो। ये ‘हरी-तरी’ और 11:56 का मेल बीकानेर की बगेचियों में परम्परा के रुप में जमा हुआ दिखाई देता है। होली हो या कोई और विशेष दिन लेकिन होलिकाष्टक के दिनों में विशेष रुप से भंग के रंग में बगीचियां रंग जाती हैं। मोहता चौक में तो बाकायदा प्रतिदिन भांग का छनाव होकर भांग लेकर लोग नत्थूसर गेट के बाहर सांसोलाव की ओर पहुंच जाते हैं और ‘भंग का रंग जमा हो चका-चक, ऐसा झटका लगे है जिया पर पुनर्जन्म हुई जाय! पर झूमने लग जाते हैं। ऐसे आलम में मास्टर मदन जैरी के सानिध्य में मस्ती करते भी देखे जा सकते हैं।

Giriraj Joshi (Bikaner)

Giriraj Joshi (Bikaner)

शहर में भांग का प्रचलन यूं ही बहुत ज्यादा होता है लेकिन जब मौका होली का हो तो इसकी खपत सामान्य से कई गुना अधिक बढ़ जाती है। इस दौरान भांग लेने वाले बगीचीयों के पास पार्क, चौकियों पर पहुंचकर मस्ती करते दिखते हैं। -गिरिराज जोशी

Jagdish Acharya (Bikaner)

Jagdish Acharya (Bikaner)

शहर में यूं तो भांग के रसिये सालभर मस्ती में रहते हैं लेकिन होली पर भंग का रंग अलग ही देखने को मिलता है। एक ही स्थान पर लोटे-कलश और जग से सीधे घोटी गयी भांग पेट में उतार ली जाती है या इसका सेवन किया जाता है। -जगदीश आचार्य

Rajeev Purohit (Bikaner)

Rajeev Purohit (Bikaner)

मरुप्रदेश राजस्थान में भांग के सेवन की परम्परा रही है। विशेषकर शिवरात्रि और होली जैसे त्यौंहारों पर शहर में भांग पीने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। इस दौरान सामूहिक रुप से भांग छानकर भांगपे्रमी भांग पीते हैं। -राजीव पुरोहित

Hemant Kiradoo (Bikaner)

Hemant Kiradoo (Bikaner)

भांगप्रेमियों के लिहाज से देखा जाए तो बीकानेर का नाम देश के कई शहरों में लिया जाता है। भांग लेने वाले शिवभक्त जहां भी भांग का छनाव शहर में होता है वहां तय समय के अनुसार 11:56 बजे पहुंच जाते हैं और रसास्वादन लेते हैं। -हेमन्त किराडू

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