बीकानेर

बीकानेर शहर का जर्रा-जर्रा पुष्करणा समाज के सावे की वैवाहिक खुशबू से महका…. / रमक-झमक ने फैलायी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पुष्करणा सावे की चमक !

बीकानेर। राजस्थान के स्वर्णनगरी नाम से विख्यात जैसलमेर में लगभग 1300 वर्ष पहले जिस पुष्करणा समाज के सामूहिक सावे की स्थापना की गई थी उसी सावे को बीकानेर में 250 वर्षों से निर्बाध थरपा जा रहा है और गुरुवार को 251 वें वर्ष में पुष्करणा समाज के सामूहिक विवाह में दुल्हा-दुल्हन ने सातों जनम के लिए एक दूजे के होने के लिए फेरे लिए। एक ही समय, एक ही मुहूर्त में यह विवाह करने से ऐसा माना जाता है कि यह विवाह बहुत ही श्रेष्ठ मुहूर्त के साथ ही सौभाग्यशाली और बेहतर होता है। महादेव-हेमान्द्री नाम से सामूहिक सावे में एक बार फिर गुरुवार को परम्पराओं का निर्वहन किया गया। परिणय सूत्र मे बंधे वर-वधू के साथ ही साथ दोनों के सभी सम्बन्धी और परिवारजन भी आजीवन एक भाव पूर्ण बंधन में बंध गए। ऐसा कहा जाता है कि विवाह से केवल दो जने ही नहीं बल्कि दो परिवारों के अनेक लोगों का सुख-दु:ख और भविष्य भी जुड़ गया। पुष्करणा समाज के सावे के दौरान पूरे शहर में शादियों की धूम सी मच गयी। सावे के दौरान सात वचन और चार फेरे लेकर दूल्हा-दुल्हनों ने जनम-जनम के लिए एक होने के लिए फेरे लिए।

Sushil ojha Adressing Programme Barah Guwad Chowk (Pushkarna Sawa-2013)

Sushil ojha Adressing Programme Barah Guwad Chowk (Pushkarna Sawa-2013)

पुष्करणा ओलम्पिक सावा मिसालदायक : सुशील ओझा
बीकानेर। विप्र फाउण्डेशन के राष्ट्रीय संयोजक सुशील ओझा ने कहा कि पुष्करणा समाज का सावे की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति है, हर्ष-उल्लास और खुशियों के साथ पुष्करणाज के वैवाहिक प्यार के बन्धन के प्रति वे अपार शुभ मंगल कामनाएं पे्रषित करते हैं। वीरवार सांय बारहगुवाड़ चौक में पुष्करणा युवा शक्ति मंच के पाटे से बतौर अतिथि ओझा ने बताया कि हालांकि ओलम्पिक सावे रुपी उल्लास को वे पहली बार देख रहे हैं। समाज की यह अनूठी वैवाहिक परम्परा मिसालदायक है। उन्होंने मंच एवं ‘रमक झमक’ के अभिनव प्रयासों की सराहना करते हुए अपने संदेशप्रद संक्षिप्त वकतव्य में कहा कि विप्र फाउण्डेशन शीघ्र ही बीते दिनों जयपुर के विप्र महाकुंभ के छोटे संस्करण में एक लाख विप्रों के संख्याबल का महाकुंभ बीकानेर जिला स्तर पर करेगा। उन्होंने विप्रों की एकता के प्रसन्नता के साथ नियमित एवं बरकरार रखने की भी अपील की। बेहद विनम्रता एवं संजीदगी भरे लफ्जों में बुजुर्गों, महिलाओं एवं समस्त ‘अपनों’ को नमन् करते हुए ओझा ने सभी का अभिवादन भी किया। इस मौके पं. छोटूलाल ओझा, प्रहलाद ओझा ‘भैरु’, सुनील बोड़ा, गोपाल आचार्य ने सुशील ओझा का माल्यार्पण, केशरिया दुपट्टा ओढ़ा स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनन्दन किया। इस मौके भाजपा नेता डा. सत्यप्रकाश आचार्य, ताराचन्द सारस्वत, मनोज ओझा सहित अनेक कोलकाता प्रवासी पुष्करणाज मौजूद थे।

जगन्नाथपुरी यात्रा कराएगा कोलकाता पुष्करणा समाज
बीकानेर। कोलकाता पुष्करणा समाज द्वारा बारहगुवाड़ चौक में प्रथम तीनों कप्पल को दो दिवसीय जगन्नाथपुरी की दो दिवसीय यात्रा का फ्री पैकेज की घोषणा की गई है। कोलकाता पुष्करणा समाज के मनोज ओझा व दीपक हर्ष ने इसकी पुष्करणा युवा शक्ति मंच के पाटे से घोषणा की।

विप्र फाउण्डेशन की ओर से दार्जिलिंग यात्रा व 1100 रुपए नकद
बीकानेर। बारहगुवाड़ चौक पहुंचे विष्णु रुपी प्रथम तीन दूल्हों के लिए विप्र फाउण्डेशन के राष्ट्रीय संयोजक सुशील ओझा की ओर से मनोज ओझा ने दार्जिलिंग यात्रा के पैकेज की घोषणा की साथ ही बीकानेर संभाग मुख्यालय से राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ताराचन्द सारस्वत की ओर से प्रथम तीनों दूल्हों हेतू ही नकद 1100 रुपए की डा. सत्यप्रकाश आचार्य ने घोषणा की।

Barah Guwad Chowk Mein Dulhon Ka Samman Karte N D Vyas, Prahlad Ojha, Pujari baba & Others (Pushkarna Sawa-Bikaner)

Barah Guwad Chowk Mein Dulhon Ka Samman Karte N D Vyas, Prahlad Ojha, Pujari baba & Others (Pushkarna Sawa-Bikaner)

Dulha Shrikant Bissa Ka Samman Karte Arvind Kishore Acharya (Pushkarna Sawa Photo)

Dulha Shrikant Bissa Ka Samman Karte Arvind Kishore Acharya (Pushkarna Sawa Photo)

3:16 बजे पहुंचे दो दूल्हे एक साथ / बारहगुवाड़ चौक में हुआ सम्मान
बीकानेर। विष्णु रुप पौराणिक गणवेश के तहत दो दूल्हे एक साथ तीन बजकर 16 मिनट पर बारहगुवाड़ बारातियों को लेकर पहुंचे जहां पुष्करणा युवा शक्ति मंच द्वारा उनका भव्य स्वागत, सम्मान किया गया। ये दो दूल्हे मेघराज भादाणी व मूलचन्द भादाणी थे जिनका सम्मान किया गया। वहीं तीसरे नम्बर पर आए दूल्हे श्रीकांत बिस्सा का भी सम्मान किया गया। दूल्हों का जिला एवं सेशन न्यायाधीश एन.डी.व्यास सहित अनेक अतिथियों ने सम्मान किया।

Mukesh Agarwal (Bikaner)

Mukesh Agarwal (Bikaner)

आपसी सद्भाव शानदार
बीकानेर। गुरुवार को पुष्करणा समाज के सामूहिक सावे के दौरान दौरान शहर की लगभग हर गली, मोहल्लों में खासी रौनक देखी गयी। जिनके घरों में यदि शादी नहीं भी है तो उनका भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वे शहर की रौनक, माहौल को अपने हृदय में बसाने के लिए बारहगुवाड़ चौक, मोहता चौक, आचार्यों के चौक पहुंच गए। इस दौरान वहीं इस अवसर पर शहर के लोगों का आपसी सद्भाव देखने लायक था। -मुकेश अग्रवाल, युवा मार्गदर्शन, बीकानेर

Mohta Chowk Mein Dulhe Ka Samman Karte Shankar Lal Harsh, Anukruty & Others (Pushkarna Sawa-Bikaner)

Mohta Chowk Mein Dulhe Ka Samman Karte Shankar Lal Harsh, Anukruty & Others (Pushkarna Sawa-Bikaner)

जनम-जनम के लिए फेरे , शहर में सजे सैकड़ों मण्डपों में बने हमसफर / मोहता चौक में भी दूल्हे हुए सम्मानित
बीकानेर। सावेमय हुए शहर में अखिल भारतीय पुष्टिकर सावा समिति व बीकाजी गु्रप की ओर से पहुंचे पहले दूल्हे को 5100 रुपए का नकद पुरस्कार दिया गया। समिति के शंकरलाल हर्ष, पुलिस उप अधीक्षक [शहर] अनुकृति उज्जैनिया, पूजारी बाबा, राष्ट्रीय संत लाल बाबाजी ने यह राशि व गिफ्ट मोहता चौक में सौंपे। इस अवसर पर एस.एन.आचार्य, नवरतन व्यास, किशन ओझा सहित सहित अनेक गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।

Pushkarna Sawa 2013 (Mohta Chowk-Bikaner)

Pushkarna Sawa 2013 (Mohta Chowk-Bikaner)

Pushkarna Sawa 2013 (Mohta Chowk-Bikaner)

Pushkarna Sawa 2013 (Mohta Chowk-Bikaner)

जाटोजी मलाई वालों की दुकान के पास भी दूल्हों का सम्मान
बीकानेर। राष्ट्रीय पुष्करणा यूथ सामाजिक संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिलीप जोशी ने पुष्करणा समाज के सामूहिक सावे पर प्रथम तीन बारातों के दूल्हों को बम्पर पुरस्कार वितरित किए। जाटोजी मलाई वालों की दुकान, मोहता चौक में लगाए मंच पर प्रथम मूलचन्द भादाणी, द्वितीय मेघराज भादाणी एवं तृतीय श्रीकांत बिस्सा को साफा, हाथघड़ी, सफारी सूट, पुष्करणा अलंकर गोल्ड कप, स्मृति चिन्ह सहित ग्यारह सौ रुपए नकद पुरस्कार के रुप में प्रदान किए। इस अवसर पर राष्ट्रीय संत लाल बाबाजी, पूजारी बाबा सहित बाबूलाल भादाणी, मांगीलाल जोशी, श्रीगोपाल भादाणी, दीपक हर्ष [कोलकाता], दिनेश कल्ला [घन्नू], जगदीश हर्ष, राजकुमार छंगाणी मौजूद रहे। प्राप्त विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।

विशिष्ट पहचान है चौक-पाटों के शहर की
बीकानेर। यूं तो बीकानेर की अपनी एक अलग ही स्टाइल, धर्मनगरी, सांस्कृतिक नगरी के चलते पहचान है इसमें भी पुष्करणा समाज को अलग अंदाज में जाना जाता है। चौक व पाटों के नाम से भी ख्यातनाम बीकानेर में वैसे भी छोटे से छोटे त्यौंहार को पूरी तैयारी के साथ पूर्ण परम्परागत तरीके से मनाया जाता है ठीक वैसे ही पुष्करणा समाज के सामूहिक सावे में भी उन्हीं परम्पराओं का निर्वहन बखूबी निभाया गया जिसकी कल्पना शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।

Pushkarna Sawa-2013 Shrikant Bissa Chanwari (Bikaner)

Pushkarna Sawa-2013 Shrikant Bissa Chanwari (Bikaner)

अग्नि को साक्षी मानकर लिए फेरे….
बीकानेर। शहर में जिन घरों में शादियां हुईं वहां वर-वधू ने विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोचारों एवं पूर्ण विधि-विधान से यज्ञ रुपी अग्नि देव को साक्षी मानते हुए फेरे लिए। धान की सात ढिगलियों को पैर से सरकाकर वर-वधू सात वचनों को स्वीकार किया गया। फेरे लेने के बाद वर ने वधू की मांग में सिन्दूर भरा। वधू की मुंह दिखाई की रस्म अदा होने के बाद बधाईयों का आदान-प्रदान शुरु हो गया। साथ ही शहरी सुरीली गूंजे शुरु हुईं केशरियो लाडो जीवंतो रे…।

Pushkarna Sawa-2013 (Barah Guwad Chowk-Bikaner)

Pushkarna Sawa-2013 (Barah Guwad Chowk-Bikaner)

बारहगुवाड़ चौक वाकई में ‘रमक-झमक’
बीकानेर। वैसे तो बीकानेर शहर में कई चौक हैं लेकिन पुष्करणा सावे में सबसे ख्याति मिलती है तो बारहगुवाड़ चौक जिसे इस बार रमक-झमक नाम दे दिया गया। यहां का नजारा वाकई में शहर मे सबसे ज्यादा रमक-झमक वाला भी रहा। यहां लगभग एक ही समय में सैकड़ों लोग मौजूद थे जिनमें महिलाओं की संख्या भी अधिक थी। वहीं इलाके के रहने वाले लोगों ने तो अपने घरों की छतों से इस सामूहिक सावे को देखा और रोमांच महसूस किया।

Preety Vyas {Bikaner}

Preety Vyas {Bikaner}

अद्भुत-अविस्मरणीय… !
बीकानेर। बीकानेर की जायी जन्मी, वर्तमान में भीलवाड़ा प्रवासी व एलएलबी कर रही प्रीति व्यास का कहना है कि उन्होंने अपने माता-पिता से पुष्करणा समाज के ओलम्पिक सावे के बारे में सुना तो था लेकिन इतना भव्य और इतना ऐतिहासिक सावा को देख आश्चर्यचकित रह गईं और वो अद्भुत, अविस्मरणीय है यह ओलम्पिक सावा। उन्होंने बारहगुवाड़ पहुंचकर सावे को न केवल देखा बल्कि अपने मोबाईल में भी अनेक पलों को ‘फेसबुक’ के लिए कैद किया।

Hemlata Nahata {Paras Restaurant-Bikaner}

Hemlata Nahata {Paras Restaurant-Bikaner}

पारस रेस्टोरेंट में सपत्निक डिनर
बीकानेर। पुष्करणा युवा शक्ति मंच द्वारा विष्णु गणवेशी दूल्हों के लिए तो विभिन्न तरह के पैकेज दिए गए ही साथ ही शहर के जयनारायण व्यास कॉलोनी मूर्ति सर्किल के समीप गोल मार्केट में स्थित पारस रेस्टोरेंट की संचालिका हेमलता नाहटा ने बताया कि बारहगुवाड़ में पहले-दूसरे नम्बर पर पहुंचने वाले विष्णु गणवेशी दूल्हों को रेस्टोरेंट में सपत्निक डिनर व दूल्हों की पत्नि के लिए उपहार दिए गए।

Pt. Namami Shnkar (Junie Maharaj) Bikaner

Pt. Namami Shnkar (Junie Maharaj) Bikaner

ओलम्पिक क्या ‘वल्र्डकप’ है !
सादगी, सरलता व एकता का परिचय एकबार फिर बीकानेरवासियों ने दिया है। पुष्करणा समाज के ओलम्पिक सावे में एक बार पुन: समाज के हर तबके का व्यक्ति एक ही दिन एक ही समय और एक ही वेशभूषा यानि विष्णुरुप में दुल्हन को लेने जाना एकता को दर्शाता है। पुष्करणा ओलम्पिक सावे ने एक बार फिर ‘वल्र्डकप’ की तरह ही शादियों का महासम्मेलन एक ही समय में करके परम्पराओं का निर्वहन किया है। पं. नमामीशंकर ‘जुनी’

kanhiya lal sewag (Mama) bikaner

kanhiya lal sewag (Mama) bikaner

शंखनाद कर वाहवाही बटोरी !
बीकानेर। शहर के ख्यातनाम शंखवादक कन्हैयालाल सेवग ‘मामा’ ने बारहगुवाड़ चौक में पुष्करणा युवा शक्ति मंच की ओर से आयोजित विष्णु रुप में आने वाले दूल्हों के सम्मान समारोह में बेहतर तरीके से शंखनाद किया। वहीं मामा ने बारातियों की मान-मनुहार होने के समय भी शंखनाद के साथ-साथ उनकी स्पेशल सौंफ-मरेटी-चूरी भेंट कर वाहवाही बटोरी।

Radhey Ojha Ramak Jhamak (Pushkarna Sawa-Bikaner)

Radhey Ojha Ramak Jhamak (Pushkarna Sawa-Bikaner)

‘लाईव’ देखने का अलग ही मजा !
बीकानेर। यूं तो पुष्करणा समाज के ओलम्पिक सावे की खासियतों के बारे में सबने सुना होगा लेकिन पढ़कर इसे समझा नहीं जा सकता लेकिन यदि बीकानेर शहर आकर इस सामूहिक सावे को देखें तो रंगत ही अलग दिखती है। बीकानेर से बाहर रह रहे प्रवासी बीकानेरी लोगों ने भी यहां सावे को पुन: देखा रमक झमक डॉट कॉम पर। जिन्होंने भी इसके बारे में सुना और पढ़ा वे भी सावे को ‘लाईव’ देख पा रहे थे। वहीं पुष्करणा युवा शक्ति मंच के राधे ओझा द्वारा तैयार रमक झमक डॉट कॉम वेबसाइट पर बीकानेर निवासी प्रवासियों ने लाईव देखकर दांतों तले अंगुली दबायी। राधे कृष्ण ओझा की तारीफ भी की गई।

प्राचीन परम्पराओं को अभी भी सहेजा पुष्करणा समाज ने
बीकानेर। परम्पराओं से विशुद्ध छोटीकाशी नाम से विख्यात बीकानेर के पुष्करणा समाज ने एक बार फिर पुरानी परम्पराओं को कायम करते हुए ‘स्वर्णाक्षरों’ में शहर का नाम लिखवा दिया। सैकड़ों वर्षों पहले जो प्राचीन परम्पराएं शुरु हुईं थी उन्हें आज तलक भी बीकानेर का पुष्करणा समाज सहेजे-संभाले हुए है और गुरुवार को सामूहिक सावे के दौरान उन्हीं परम्पराओं का निर्वहन किया गया।

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