बीकानेर

घर की जगमगाहट और खिलखिलाहट है बेटियां : डा. हबीब / सीएमएचओ में कार्यशाला में बोले आरपीएससी सदस्य

Ips Dr Habeeb Khan Gauran, Dr Devendra Chaudhry, Rishibala Shrimali Programme in Bikaner.

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बीकानेर। घर की जगमगाहट और खिलखिलाहट है बेटियां। घर की खुशहाली बिना बेटियों के नहीं होती। यह बात सोमवार को बीकानेर जिले के पूर्व पुलिस अधीक्षक व वर्तमान में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के सदस्य डा. हबीब खान गौराण ने ‘बेटी बचाओ अभियान और पीसीपीएनडीटी एक्ट के जिले में सफल क्रियान्वयन हेतु जिला स्तरीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि रखे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, पीसीपीएनडीटी सैल द्वारा खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारीयों, सीएचसी प्रभारीयों, सोनोलोजिस्ट और सामाजिक कार्यकर्ताओं की आज एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्थानीय स्वास्थ्य भवन में किया गया।

Report Updated By Journalist Rajeev Joshi (Bikaner)

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कार्यशाला में बिगडते लिंगानुपात और लडके की चाह में बेटियों के साथ होने वाले भेदभाद पर भी चर्चा की गई। डा. गौराण ने कहा कि प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण के लिये सबसे ज्यादा जिम्मेदार प्रारंभिक तौर पर उसके मां बाप ही होते है। जब संरक्षक ही भक्षक बन जायें तो फिर किसे दोष दिया जायें। समाज की इस मानसिकता में बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने चिकित्सक वर्ग से आग्रह किया कि वे पीसीपीएनडीटी एक्ट के सफल क्रियान्वयन में मानवीय दृष्टिकोण से सोचे और लडके लडकी का भेद मिटाने में सामाजिक रूप से आगे आए। समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एक्ट और उपखण्ड अधिकारी ऋषिबाला श्रीमाली ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि बेटियो से ही घर का मान और जगमगाहट है। लडकियां लडकों की अपेक्षा ज्यादा भावनात्मक रूप से अपने परिवार से जुडी हुई होती है। आदि काल से ही पुरूषों द्वारा महिला को षक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है परन्तु व्यवहार में हमेशा उसके साथ भेदभाव किया गया। प्रसव पूर्व लिंग परीक्षण करने वालों के खिलाफ कडाई से कार्यवाही विभाग द्वारा की जायेगी और लडके लडकियों में भेद मिटाने हेतु समाज में मानसिकता बदलाव के कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक जोन डा0 सोहललाल गोदारा ने बताया कि बिगडते लिंगानुपात का भयावह रूप जल्दी ही समाज में देखने को मिलेगा। समाज में बलात्कार, लूटपाट और महिलाओ के साथ षोंषण जैसी घटनाओं को रोकने के लियें स्वस्थ्य लिंगानुपात का होना बेहद जरूरी हैै। ग्रामीण क्षेत्रों में इस हेतु विषेष प्रचार प्रसार करने की जरूरत है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने कहा कि विभाग कन्या भू्रण हत्या को लेकर बेहद संवेदनशील है। समाज में बिगडते हुए लिंगानुपात को रोकने के लियें पीसीपीएनडीटी सैल द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे है। इससे पूर्व पीसीपीएनडीटी समन्वयक महेन्द्र सिंह चारण ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के बारे में उपस्थित अतिथियों को बताया और जिले में पीसीपीएनडीटी एक्ट के सफल क्रियान्वयन के लिये हो रहे प्रयासों के बारे में चर्चा की। कार्यषाला में उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी(परिवार कल्याण) डा0 सागरमल शर्मा और जिला औषधी भण्डार के नोडल अधिकारी डॉ. नवलकिशोर गुप्ता ने भी संबंोधित किया। कार्यषाला का संचालन जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीलू मेघवाल ने किया।
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