बीकानेर

गृहस्थी जीवन में एक वर्ष में ही कर डाला ‘महादान’ / अद्भुत ‘कन्यादान’ पुष्करणा समाज में चर्चा का विषय

Sandeep Kiradoo & Archna Kiradoo (Bikaner)

Sandeep Kiradoo & Archna Kiradoo (Bikaner)

Alka Vyas & Naresh (Bikaner)

Alka Vyas & Naresh (Bikaner)

बीकानेर। भारतीय संस्कृति में दान-पुण्य का बहुत बड़ा महत्व है। मानव जीवन में दान का पुण्य कमाने के उद्देश्य से देवता भी धरती पर मां की ममता पाने आते हैं। मां की कोख से पुत्र रत्न और पुत्री का जन्म और इन दोनों का भाई-बहिन का सम्बन्ध दुनिया के पवित्र रिश्तों में प्रमुख है। हर मां-बाप की यह चाह होती है कि वे कन्या दान कर अपना सामाजिक दायित्व भी निभाएं और पुण्य कमाएं। वेद शास्त्रों में कन्यादान का बहुत बड़ा महत्व है या यूं कहें कि कन्यादान महादान है। कुंआ खुदवाना, पेड़ लगाना, मां-बाप की सेवा करना, गौसेवा करना, गंगा स्नान, यज्ञ में आहूति इत्यादि ऐसे अनुष्ठान और दान हैं जिनसे भी बढ़कर ‘महादान’ कन्यादान को माना गया है।

Report By Journalist Rajeev Joshi (Bikaner)

Report By Journalist Rajeev Joshi (Bikaner)

इस दान का पुण्य कमाने के लिए गृहस्थ को अपना पूरा जीवन लगा देना पड़ता है। किंतु माता-पिता, दादा-दादी और खानदान के बड़ों के पुण्य प्रताप से जिस दम्पत्ति को यह पुण्य कमाने का अवसर शीघ्र मिल जाता है वे समाज में देवतुल्य सम्मान पाते हैं। ऐसा ही सम्मान बीकानेर के ख्यातनाम भैरव उपासक व शिव शक्ति साधना पीठ के संस्थापक अध्यक्ष पं. मनमोहन किराडू (मो. 93517-74689) के पुत्र संदीप किराडू पुत्रवधू अर्चना किराडू को कमाने का अवसर मिला। अनुपम और अनुकरणीय यह अदï्भुत अनुष्ठान समाज में चर्चा का विषय इसलिए भी बन गया है कि कन्यादान करने वाले दम्पत्ति (संदीप किराडू व अर्चना किराडू) को गृहस्थ जीवन में प्रवेश किए अभी एक वर्ष ही हुआ है और उन्हें अपनी संतान को गोद में खिलाने का सुख प्राप्ति की प्रतीक्षा भी है। अपनी संतान अब तक न होते हुए भी बड़ों के पुण्य प्रताप से और कन्या के सांसारिक पिता (राजेन्द्र व्यास-गंगादेवी व्यास) के सहयोग से इस दम्पत्ति ने विवाह समारोह में अलका व्यास का दान उसके पति नरेश को किया जिसके साक्षी समाज के लोग नहीं अनेक गणमान्य लोग बने। इससे भी अलग चर्चा यह रही कि कन्यादान करने वाले दम्पत्ति के पिता पं. मनमोहन किराडू ने भी अब तक कन्यादान का पुण्य नहीं कमाया है। इसी वजह से वेद शास्त्रों का यह कथन यथार्थ रुप लेता दिखाई दिया कि पूर्व जन्मों के फल से और परिवार में बड़ों के आशीर्वाद से ही कन्यादान और पुण्यदायी कर्म करने का अवसर इस दम्पत्ति (संदीप किराडू व अर्चना किराडू) को मिला।

Manmohan Kiradoo (Bikaner)

Manmohan Kiradoo (Bikaner)

मनुष्य के सांसारिक जीवन में यदि कोई दान महत्वपूर्ण माना गया है तो वह है कन्यादान करना, ऐसा नसीब तो मुझे भी नहीं हुआ और मैं भाग्यशाली इसलिए हूं कि मेरे पुत्र संदीप किराडू ने यह दान करके बड़ा ही पुण्य कमाया है। इसके लिए उसे ढेर सारा आशीर्वाद। -पं. मनमोहन किराडू

Rajendra Vyas (Bikaner)

Rajendra Vyas (Bikaner)

मैंने स्वयं ने अपनी भतीजी का कन्यादान किया, मेरे एक बड़ी लड़की का कन्यादान मेरे बड़े भाईसाहब ने किया और दूसरी लड़की का कन्यादान मेरे पुत्र ने किया वहीं तीसरी लड़की का कन्यादान मेरे पं. मनमोहन किराडू के पारिवारिक रिश्ते होने की वजह से उन्हें कहा तो उन्होंने अपने पुत्र से कन्यादान करवाया। -राजेन्द्र व्यास

Rita Bissa (Bikaner)

Rita Bissa (Bikaner)

महिला गृहिणी रीटा बिस्सा बताती हैं कि वृक्ष लगाने से वह समृद्धशाली बनता है। वहीं विश्व का कल्याण गाय पर आधारित है तो गाय की सेवा करने से दीर्घायु व निरोगता मिलती है। माता-पिता सदैव पूजनीय होते हैं। हिन्दू धर्म में माता की अनुमति के बिना पुत्र को गृहस्थ जीवन से विमुक्त होने की आज्ञा नहीं है। माता-पिता को ही देवतुल्य माना जाना चाहिए। उपाध्यायों से 10 गुणा श्रेष्ठ आचार्य, आचार्य से 100 गुना श्रेष्ठ पिता और पिता से हजार गुना श्रेष्ठ माता गौरव से युक्त होती है। इसलिए माता-पिता की सेवा में ही सच्ची सेवा है। लेकिन कन्यादान एक ऐसा दान जो लड़की को अलंकृत कर ब्राह्मा विधि से विवाह करते हैं, कन्यादान करते हैं वे निश्चय ही अपने सात पूर्वजों और सात वंशजों को नरक भोग से बचाते हैं। साथ ही कन्यादान करने से उस लड़की से उत्पन्न पुत्र बारह पूर्वजों और बारह अवरणों को पवित्र करता है।
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