बीकानेर

पंचमुखी भगवान शंकर की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा / नवलेश्वर मठ में विवेकनाथजी का निर्वाण दिवस मनाया

Panchmukhi Shiv Pratima Pran Pratishtha in Navleshwar Math-Bikaner

Panchmukhi Shiv Pratima Pran Pratishtha in Navleshwar Math-Bikaner

Shivsatya Nathji Maharaj (Bikaner)

Shivsatya Nathji Maharaj (Bikaner)

Prahladnathji (Bikaner)

Prahladnathji (Bikaner)

बीकानेर, 18 दिसम्बर। श्री नवलेश्वर मठ के पूर्व अधिष्ठाता एवं उत्तमनाथजी के शिष्य विवेकनाथजी का 45 वां निर्वाण दिवस श्रद्धावत व धूमधाम से मनाया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार को संध्या जागरण के साथ हुई। पूरी रात चले जागरण में दूर-दराज से आए संतों और कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दे श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। विशेषकर अवधूत वाणियों से सुसज्जित कर्णप्रिय भजनों से कार्यक्रम में आए असंख्य संत और भक्त भावविभोर हो गए। तत्पश्चातï् रविवार को कार्यक््रम के मुख्य दिन विवेकनाथजी की समाधि का पूजन धूमधाम से शिवसत्यनाथजी के साथ-साथ प्रहलादनाथजी, चुन्नीनाथजी, गणेशनाथ्ज्ञ व पूर्णनाथ ओसियां, रघुनाथ मांझवास, त्रिलोकनाथ डेगाना व दूरदराज से आए अनन्य संतों ने श्रद्धापूर्वक किया जिसके साक्षी असंख्य भक्त और संत बने। समाधि पूजन के बाद सामूहिक महिम्न का पाठ हुआ जिसमें भक्तजन शामिल हुए। महिम्न पाठ के पश्चातï् सभा में उपस्थित संतों व भक्तों की अपार भीड़ को सम्बोधित करते हुए प्रहलादनाथजी ने विवेकनाथजी का जीवन परिचय दिया। उन्होंने बताया कि विवेकनाथजी ओजस्वी, वाक्यशैली, त्यागी एवं प्रगाढ़ तपस्वी थे। उन्होंने 25 वर्ष की अल्पायु में ही सम्वतï् 1980 को घर त्याग दिया तथा सम्वतï् 1987 में सन्यास ले प्रभु भक्ति में तल्लीन हो गए। उन्होंने अपने जीवनकाल में कई पुस्तकों की रचना की। जिसमें विवेकचन्द्रोदय, विवेकभानु, वेद सार विवेक रवि एवं विवेक मार्तण्ड आदि प्रमुख हैं। जिसमें ईश्वर भक्ति के साथ ही मर्यादित मनुष्य जीवन पर प्रकाश डाला गया है। प्रहलादनाथजी ने बताया िक विवेकनाथजी ने अपने गुरु से प्राप्त शिक्षा को सदैव अपने जेहन में बैठाए रखा व उसकी पालना की। मठ के अधिष्ठाता शिवसत्यनाथजी ने कहा कि आचार और विचार से मनुष्य को शुद्ध होना चाहिए तभी मनुष्य का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अगर मन, कर्म और वचन से पवित्र है और जनकलयण की भावना रखता है तो उसका उद्धार अवश्यंभावी है। उसके उद्धार को कोई नहीं रोक सकता है व भगवतï् प्राप्ति के साथ-साथ जनकल्याण में ऐसे व्यक्ति सहायक होते हैं। उन्होंने कहा कि परोपकार से बड़ा कोई दान नहीं है, व्यक्ति को परोपकारी बनना चाहिए। तत्पश्चातï् मठ में स्थापित पंचमुखी भगवान शंकर की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हुई। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण व भण्डारा हुआ जिसमें सभी संत व भक्तजनों ने गुरु का स्मरण करते हुए प्रसाद ग्रहण किया।
—————————————————————————————
Bikaner News, Panchmukhi Shiv Pratima Pran Pratishtha in Navleshwar Math-Bikaner, Bikaner Hindi News, Rajiv Joshi, Prahladnathji (Bikaner), Shivsatya Nathji Maharaj (Bikaner), Journalist Rajeev Joshi

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



Most Popular

To Top