बीकानेर

पुत्रों की दीर्घायु के लिये गाय-बच्छड़ों की पूजा

Kamla Joshi, Renu Joshi & Chitra Vyas Programme in Bachbaras in Bikaner.

Kamla Joshi, Renu Joshi & Chitra Vyas Programme in Bachbaras in Bikaner.

Journalist Rajeev Joshi, Kamla Joshi & Renu Joshi Programme in Bach Baras in Bikaner.

Journalist Rajeev Joshi, Kamla Joshi & Renu Joshi Programme in Bach Baras in Bikaner.

Journalist Rajeev Joshi & Little Kanha Joshi (Krishna) Programme in Bach Baras in Bikaner.

Journalist Rajeev Joshi & Little Kanha Joshi (Krishna) Programme in Bach Baras in Bikaner.

 Radha Joshi, Narbada Devi Joshi, Manju Joshi & Renu Joshi Programme in Bachbaras in Bikaner.

Radha Joshi, Narbada Devi Joshi, Manju Joshi & Renu Joshi Programme in Bachbaras in Bikaner.

Journalist Sanjay Joshi Programme in Bach Baras in Bikaner.

Journalist Sanjay Joshi Programme in Bach Baras in Bikaner.

Journalist Rajeev Joshi Programme in Bachbaras in Bikaner.

Journalist Rajeev Joshi Programme in Bachbaras in Bikaner.

Praveen Purohit Programme in Bachbaras in Bikaner

Praveen Purohit Programme in Bachbaras in Bikaner

Banshi Joshi, Manju Joshi & Ranu Joshi Programme in Bachbaras in Bikaner.

Banshi Joshi, Manju Joshi & Ranu Joshi Programme in Bachbaras in Bikaner.

बीकानेर, 26 अगस्त। जहां एक तरफ गाय को मां का दर्जा दिया गया है वहीं परम्पराओं के तहत मां-बछडे क़ी पूजा कर महिलाएं अपने पुत्र, परिवार की सलामती व खुशहाली की कामना करती है।

Report By Rajeev Joshi (BIKANER)

Report By Rajeev Joshi (BIKANER)

यही परम्पराएं समाज को आपस में जोडे रखती है व एक अटूट बंधन का अहसास कराती है। शुक्रवार को भी शहर में मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से महिलाओं ने पुत्रों की दीर्घायु व स्वस्थ रहने की कामना को लेकर न केवल व्रत किया बल्कि गाय का दूध, दूध से बने उत्पाद, गेहूं से बने खाद्य पदार्थों के अलावा लोहे के चाकू से काटी हुई खाद्य सामग्री का परहेज किया और गोधूलि वेला से पूर्व बाजरे की रोटी, मोठ, सांगरी की सब्जी समेत भैंस के दूध व दही का सेवन कर व्रत खोला। पूजा-अर्चना कर महिलाओं ने गाय, बछडे क़ो कुमकुम से तिलक कर मोळी बांधी और बाजरे के आटे से बने लड्डू को खिलाया। तत्पश्चात् कहानी सुनकर पुत्र के पांव के अंगूठे से गोबर से बनी पाळ को तुड़वाया। साले की होली क्षेत्र में पूजा करने वाली महिला गृहिणी नर्बदा देवी जोशी व श्रीमती मंजू जोशी ने बताया कि इस दिन सुबह से ही गाय-बछडे क़ी पूजा करने को तैयार महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। मान्यताओं के बारे में महिला गृहिणी मीना मोदी, सुनीता, कमला, सुशीला बताती हैं कि जिस वर्ष लड़के का विवाह या लड़का पैदा होता है तो यह उजमन किया जाता है। इस दिन पहले एक सेर बाजरा दान देना चाहिए। वहीं एक थाली में 13 मोठ, बाजरे की ढेरी बनाकर उस पर 2 मुट्ठी बाजरे का आटा जिसमें चीनी मिली होवे रख देंवे और रुपए रखें। इस सामान को हाथ फेर कर अपनी सास को धोक लगाकर दे देवें। तत्पश्चात् बछडे अौर कुंआ की पूजा करें फिर मंगल गीत गावें। इसके बाद ब्राह्मणों को दक्षिणा देनी चाहिए। वहीं महिलाओं को अपने कंवारे की कमीज पर सथिया बनाकर पहनावे और कुंए को पूजने से बच्चे के जीवन की रक्षा होती है और भूत-प्रेत, नजर और रात के अचानक डर से बचत होती है।
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