बीकानेर

सास-बहू की बीकानेर में अनूठी एकता / एक साथ किया चौमासा, यज्ञ कर किया प्रसाद का आयोजन

Uma Devi Vyas w/o Kaluram Vyas (Puna/Bikaner)

Uma Devi Vyas w/o Kaluram Vyas (Puna/Bikaner)

Yogita Vyas w/o Yogesh Vyas (Puna/Bikaner)

Yogita Vyas w/o Yogesh Vyas (Puna/Bikaner)

बीकानेर। भारतीय संस्कृति में पुरातन काल से परम्पराओं का निर्वहन परिवार सामूहिक रुप से कुटुम्ब (एकता) के रुप में निभाते हैं। कुटुम्ब की परम्परा आज आधुनिक युग के चकाचौंध में भले ही विलुप्त होती नजर आए किन्तु संस्कृति की जडें हरी ही रहती हैं। ऐसा ही उदाहरण एक कुटुम्ब में यहां आज ही देखने को मिला। सास-बहू ने मिलकर सकुटुम्ब हवन आदि अनुष्ठान करवाए। मौका था पिछले वर्ष चौमासे में एक साथ व्रत कर उसके उद्यापन यज्ञ का।

Report By Rajeev Joshi (Bikaner)

Report By Rajeev Joshi (Bikaner)

इस दौरान बड़ी संख्या में सभी परिवार के सदस्यों, मित्र-बन्धुओं के साथ एक पंगत में बैठकर न केवल इस समारोह में भाग लिया बल्कि एक साथ प्रसाद भी ग्रहण किया। वर्तमान दौर में जहां विवाह के बाद जब एक तरफ नई बहू घर में आती है तो उसका उसकी सास के साथ किसी न किसी बात को लेकर ‘झगड़ा’ हो ही जाता है वहीं इन दिनों में टीवी के अनेक चैनलों में ‘हकीकत की दुनिया का अंश’ सास-बहू के झगडे क़े रुप में दिखाया भी जाता है जिसके आधार पर भी एक परिवार में वाद-विवाद, द्वन्द्व और सदस्यों के आपसी खींचतान के दृश्य भी लोगों के लिए अब नए नहीं रहे। धारावाहिकों में देखा भी गया है कि सास-बहू के रिश्ते में प्रेम बहुत कम देखने को मिलता है। ऐसे में बीकानेर निवासी व पूना, मुम्बई प्रवासी उमा व्यास पत्नि कालूराम व्यास ने अपनी पुत्रवधू योगिता व्यास पत्नि योगेश व्यास के साथ पूना में एक साथ चौमासा किया और सोमवार को यज्ञ कर उसमें आहूतियां दीं उसका एक तरह से उद्यापन किया। सास-बहू की इस अनूठी एकता ने तो सभी लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया ही वहीं इतने बडे अायोजन को एक कुटुम्ब द्वारा सम्पन्न कराना भी समाज में खुशी का संदेश लाया। परिवार की ही एक महिला मीनाक्षी रंगा का कहना है कि ऐसे में आधुनिक युग की बहू योगिता व्यास और 60 वें दशक को जी रही सास उमा व्यास का आपसी प्रेम, सामंजस्य और एकजुट होकर सामाजिक, धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण कराना दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक है। कहते हैं कि शिक्षा का प्रभाव हर किसी पर पड़ता है। शिक्षित चाहे बच्चा हो, जवान हो या हो बूढ़ा उसकी सोच परिपक्व होती है और परम्पराओं को ग्रहण करना महत्वपूर्ण समझा जाता है। वे शिक्षित दूसरों को भी इसका उदाहरण क्रियान्विति के रुप में प्रस्तुत करते ही हैं। पूना के लोग भी बीकानेर के इस सास-बहू की अनूठी परम्परा को सराहते हैं।
————————————————————————————–
Bikaner News, Bikaner Hindi News, Rajasthan News, Rajasthan Hinei News, Rajeev Joshi, Rajiv Joshi, Uma Devi Vyas, Kaluram Vyas, Yogita Vyas, Yogesh Vyas, Meenakshi Ranga

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *



Most Popular

To Top