बीकानेर

राजा, देवता और गुरु के हाथ कभी खाली नहीं होते : धर्म धुरन्धरजी / विभिन्न मंदिरों की पदयात्रा-दर्शन बाद ‘ढङ्ढा कैसल’ में प्रवचन आज / भक्ति के भावों से भरी नजर आयी ‘छोटीकाशी’

Jainacharya Dharam Dhurandhar Surishwar Ji Maharaj

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Bikaner News & Photo Updated By ChhotiKashi.com

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बीकानेर, 19 सितम्बर। हमारी आत्मा चन्दन का पेड़ है, परमात्मा स्वयं तत्व स्वरुप है, जैन समाज में परम्परा नहीं गुणों का महत्व है, 8 गुणों को धारण करने वाला ही सिध्द हो सकता है। इन कथनों के साथ भक्ति के संस्कार को दृढ बनाने का संकल्प दिलाया जैनाचार्य श्रीमद् विजय धर्मधुरन्धर सूरीश्वरजी महाराज ने। अनेक संस्मरणों के साथ अपने प्रवचनों में रविवार सुबह यहां वेदों का चौक त्रिपोलिया में उत्साही भक्तों की भीड़ को पर्यूषण पर्व में चैत्य परिपाटी को कर्तव्य बोध की निशानी बताते हुए उन्होंने कहा कि आत्मा को कर्मों से मुक्त करने के लिए जिनेन्द्र भगवन्त हैं ना, आत्मरुपी मंदिर में परमात्मा व उसके नाम स्वरुप का अलंबन लेने की बात के साथ जैनाचार्यश्री ने बताया कि राजा, देवता और गुरु के हाथ ना कभी खाली होते हैं ना ही इनके पास खाली हाथ जाना चाहिए।

Article By Journalist Vinay Joshi

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उन्होंने श्रध्दासुमन फल, नैवैद्य, धूप, दीप, अक्षत स्वस्तिक के साथ पूजन व उससे मिलने वाले संस्कारों को भी बतलाया। धर्मसभा में अपनी व्याख्यानमाला में यह भी कहा कि परमात्मा के दर्शनों से पावनता और पवित्रता के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। कर्मों के क्षय हेतू परमात्मा के स्मरण करने का भी उन्होंने आह्वान किया। इस अवसर पर मुनि ऋषभ चंद्र विजयजी ने कहा कि परमात्मा के दर्शनों से कर्मों की निर्झरा नष्ट होती है वहीं आत्मा विकारों से मुक्त होती है। व्याख्यान के दौरान मुनि धर्मरत्न विजय जी ने कहा कि परमात्मा के दर्शनों से आत्मस्वरुप को मार्गदर्शन प्राप्त होता है तथा कर्मों की मलिनता नष्ट होती है। साध्वीश्री कल्पलताश्री ने व्याख्यान देते हुए कहा कि परमात्मा के प्रति श्रध्दाभाव से राग उत्पन्न करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परमात्मा के दर्शन मात्र से ही जीवन को सद्गति प्राप्त होती है। धर्मसभा में तपस्वनी श्रीमती मनोज सिरोहिया का अभिनन्दन किया गया। श्री जैन श्वेताम्बर तपागच्छ श्रीसंघ के मंत्री विजय कुमार कोचर ने बताया कि चैत्य परिपाटी के तीसरे और अंतिम दिन सोमवार को जैनाचार्यश्री की निश्रा में विभिन्न जैन मंदिरों के दर्शनार्थ यात्रा रांगड़ी चौक से प्रात: साढे छह बजे प्रारम्भ होगी जो ढङ्ढों के चौक में धर्मसभा के रुप में परिवर्तित होगी। श्रीसंघ के मंत्री कोचर ने बताया कि रविवार को मुनिराज धर्मबोधि विजय जी की तपस्या के अवसर पर पौषधशाला में महिलाओं द्वारा सांझी भजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहीं शाम को कोचर फे्रण्ड्स क्लब की ओर से पौषधशाला में भक्ति संगीत संध्या का आयोजन किया गया जिसमें नगर की विभिन्न मण्डलियों ने भक्ति गीतों की प्रस्तुतियां दीं। रविवार को ही जैनाचार्य की निश्रा में तीसरे दिन भी धर्म ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया गया जिसमें जैनाचार्य श्रीजी ने श्रावक-श्राविकाओं को नवकार महामंत्र की साधना का विधिवत् प्रािशक्षण दिया। लाली बैद ने बताया कि नमोजिनाणम के साथ परमात्मभक्ति भजनों की गूंजती स्वर लहरियों ने नगर के अन्दरुनी मोहल्लों को भक्तिमयी रंग से सराबोर कर दिया। सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति से एक बार फिर छोटीकाशी बीकानेर भक्ति के भावों भरा नजर आया। चैत्य परिपाटी यात्रा भुजिया बाजार स्थित चिंतामणि मंदिर, नाहटा चौक के आदिश्वरजी, शांतिनाथजी, आसानियों का चौक स्थित महावीर स्वामी, सतीबाई का उपासरा, पद्मप्रभू जी तथा बैदों के चौक स्थित महावीर स्वामी जी के मंदिर में दर्शन एवं चैत्य वंदना के पश्चात् रानीबाजार स्थित बैदों के त्रिपोलिया में धर्मसभा के रुप में परिवर्तित हुई।

मुजफ्फर अहमद कादरी भी बोलते हैं ‘जै जिनेन्द्र’
बीकानेर। नाम मुजफ्फर अहमद कादरी, उम्र 72 वर्ष है रेलवे से रिटायर्ड कम्पाऊण्डर। इस मुस्लिम बुजुर्गवर की अपने धर्म के प्रति जितनी आस्था है उतनी ही श्रध्दाभाव वे जैन मुनि या इस समाज-धर्म के प्रति रखते हैं। जैन धर्मावलम्बी से बाकायदा वे ‘जै जिनेन्द्र’ के उच्चारण से संवाद करते हैं।

Mujaffar Ahmed

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वर्ष 2000 से प्रख्यात संत विजय इन्द्रदिन सूरी जी महाराज के एक इंसुलिन इंजेक्शन उन्होंने लगाया था मगर वे बताते हैं उसी दिन उन्हें एक ऐसा ‘इंजेक्शन’ लग गया कि वो दिन है और आज का दिन है, वे पूर्णतया शाकाहारी और सात्विक तथा परोपकारी जीवन जी रहे हैं। बकौल कादरी उन्होंने अनेक जैन मुनियों के साथ पदयात्राएं की है। अठाइसा सहित विभिन्न मौनव्रत भी किए है। यही नहीं वे रोजा भी रखकर अपना ईद पर्व जैसे मनाते हैं वैसे ही जैन मुनियों के पर्यूषण पर्व में शिरकत कर प्रवचनों को सुन जीवन में उतार रहे हैं। वे बताते हैं कि सभी जैन मुनिसंत व समाज के लोग उन्हें बेहद स्नेह भी देते हैं।
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