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जानें, उन टॉप साइट्स के बारे में जो खतरनाक हैं आपके लिए

जानें, उन टॉप साइट्स के बारे में जो खतरनाक हैं आपके लिए दुनियाभर में मौजूद युवा अपना ज्यादातर समय फेसबुक, टि्वटर, इंस्टाग्राम और बाकी अन्य सोशल साइट्स पर बिताते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये आपकी मानसिक स्थिति के लिए बेहद ख़तरनाक है.

युवाओं में सेल्फी के साथ-साथ सोशल साइट इंस्टाग्राम का खासा क्रेज़ है. अपनी हर तस्वीर को युवा दोस्तों और फॉलोवर्स के साथ शेयर करते हैं. लेकिन, ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी की रिसर्च में इससे जुड़ा एक चौंकाने वाला सच सामने आया है.

रिसर्च के मुताबिक सोशल साइट इंस्टाग्राम किसी भी इंसान की मानसिक हालात के लिए बेहद ख़तरनाक है. पढ़िए उन टॉप 5 साइट्स के बारे में जो युवाओं के लिए सबसे नुकसानदायक है.

युवा वर्ग पर आधारित रिसर्च
रॉयल सोसाइटी की इस रिसर्च में 14 से 24 साल के आयु वर्ग के 1479 युवा शामिल थे. इन लोगों से 14 सवाल पूछे गए कि उन्हें इन साइट्स के इस्तेमाल से कैसा अनुभव होता है?
इस रिसर्च में कई मानकों के आधार पर सोशल मीडिया साइट्स की रैकिंग दी गई है. जैसे इन साइट्स का इंसान की नींद और बॉडी इमेज पर क्या असर पड़ता है? साथ ही लोग अपनी साइट्स पर आने वाले फीड को कैसे देखते हैं?

डिप्रेशन और अकेलेपन का दंश
इंस्टाग्राम सहित स्नैपचैट, फेसबुक और टि्वटर जैसी अधिकतर साइटों का फीडबैक नेगेटिव मिला. इनका इस्तेमाल करने वाले ज्यादातर युवा कम नींद और थकान से पीड़ित मिले.

विशेषज्ञों ने माना कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद फोटो युवाओं को प्रभावित करते हैं. खासकर लड़कियां इंस्टाग्राम जैसी साइटों से ज्यादा प्रभावित होती हैं. एडिट और फिल्टर जैसे ऑप्शन फोटो को बेहतर तो बनाते हैं लेकिन औसत दिखने वाले युवा दूसरों के फोटो देखकर अपने बारे में गलत धारणा कायम करते हैं.

2 घंटे से ज्यादा वक्त गुज़ारना ख़तरनाक
इस निष्कर्ष के अलावा विशेषज्ञों ने माना कि 2015 में आई रिसर्च सही है, जिसमें 2 घंटे से ज्यादा सोशल साइट्स पर वक्त गुज़ारना ख़तरनाक माना गया है. ऐसा करने वाले युवा मानसिक राेग, मनोवैज्ञानिक विकार और आत्महत्या जैसे विचारों से ग्रस्त हो सकते हैं.

लेकिन विशेषज्ञ सभी सोशल साइट्स की ऐप्लीकेशन डिलीट करने की सलाह नहीं देते हैं. उनका मानना है कि सभी का इस्तेमाल एक तय वक्त के हिसाब से होना चाहिए.

यू-ट्यूब बाकी साइट्स से बेहतर
वैसे तो रिसर्च में सभी सोशल साइट्स कहीं न कहीं ख़तरनाक मानी गई हैं लेकिन उन सभी में यू-ट्यूब थोड़ा बेहतर है.रिसर्च में शामिल युवाओं के मुताबिक यू-ट्यूब पर समय बिताने पर किसी ईर्ष्या और डिप्रेशन के शिकार नहीं होते. जिसकी गुंजाइश बाकी सोशल साइट्स पर ज्यादा दिखाई देती हैं.

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